नेचर फेस्टिवल के दौरान दिखा हिमालयन ग्रिफिन वल्चर । स्रोत: वन विभाग
- फोटो : नेचर फेस्टिवल के दौरान दिखा हिमालयन ग्रिफिन वल्चर । स्रोत: वन विभाग
पिथौरागढ़। अस्कोट वन्य जीव अभयारण्य में वन विभाग और विंग्स फाउंडेशन की ओर से आयोजित तीन दिनी नेचर फेस्टिवल का समापन हो गया है। प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। उन्होंने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि अस्कोट वन्य अभयारण्य में जैव विविधता समृद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फेस्टिवल के दौरान प्रतिभागियों ने 112 प्रजातियों के मॉथ, 92 प्रजाति की तितलियां और 45 प्रजातियों के पक्षियों का अवलोकन किया। इस दौरान मून मॉथ, कॉफी बी हॉक मॉथ, टाइगर तितलियां, उत्तराखंड की राज्य तितली कॉमन पीकॉक, राष्ट्रीय तितली ऑरेंज ओकलीफ एवं भारत की सबसे बड़ी तितली गोल्डन बर्डविंग जैसी दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिलीं। पक्षियों में हिमालयी मोनाल, ग्रिफॉन वल्चर, बेयर्ड वल्चर और किंग वल्चर जैसे महत्वपूर्ण पक्षियों का भी दीदार हुआ। इससे प्रतिभागी काफी उत्साहित रहे। कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बटरफ्लाई रिसर्च सेंटर भीमताल के विशेषज्ञ पीटर स्मेटचेक और पादप वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए उनकी जिज्ञासा का समाधान किया। इस अवसर पर बृजेश धर्मशक्तू, चंदन कुमार, जगदीश भट्ट समेत प्रतिभागी मौजूद रहे। संवाद