पिथौरागढ़। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में वर्ष 2005 से 2022 तक 9190 टीबी रोगी मिले हैं। वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन साल दर साल घट-बढ़ रही टीबी रोगियों की संख्या को देख वर्ष 2025 में टीबी मुक्त भारत होना बहुत मुश्किल लग रहा है। हालांकि, पिथौरागढ़ क्षय अस्पताल में टीबी रोगियों का विशेष ध्यान रखकर उन्हें बेहतर सेवाएं दी जा रहीं हैं।
पिथौरागढ़ जिले में सरकार ने 15 अगस्त 2004 से राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया था। सरकार ने वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा। यदि क्षय रोग विभाग से मिले आंकड़ों को देखें तो जिले में लगातार क्षय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह हाल तब है जब क्षय रोग विभाग जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम कर रहा है।
पांच साल में टीबी रोगियों की संख्या
वर्ष - टीबी रोगी
2018 532
2019 440
2020 357
2021 467
2022 350
कुल 2146
ये हैं टीबी के लक्षण
अधिक दिनों तक खांसी जैसे तीन या अधिक सप्ताह तक
खांसी के साथ बलगम आना
खांसते वक्त बलगम के साथ खून आना
खांसी होने पर सांस लेने में दिक्कत और सीने में दर्द होना
अचानक शरीर का वजन कम हो जाना
हर समय थकान महसूस होना और अक्सर बुखार आना
ऐसे करें बचाव
मास्क का प्रयोग करें
बार-बार हाथ धोएं
साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखें
खांसते-छींकते समय रुमाल रखें
भीड़ से दूरी बनाए रखें
अगर किसी व्यक्ति से मिलना जरूरी हो तो खुले में मिलें
कोट
टीबी के इलाज के लिए अस्पताल आ रहे रोगियों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। उनका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। रोगी लगातार ठीक हो रहे हैं। - डॉ. कुंदन कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी पिथौरागढ़।