पिथौरागढ़। सातूं-आठूं पर्व पर छाए संशय को पंडितों ने दूर कर दिया है। पंडितों का कहना है कि चंद्रमासीय व्रत होने के बाद भी दूर्बाष्टमी (सातूं-आठूं) को सौरमान से नियमित करने का विधान शास्त्र में बताया गया है। इस व्रत को भाद्रपद मास में अगस्त्य तारे का उदय होने के पूर्व करने का विधान बताया गया है। पंडितों का कहना है कि पौराणिक मत से अगस्त्य तारे का उदय उज्जैन में 23 गते भाद्रपद को होगा।
विषाड़ गांव के विद्वान पंडित गुणानंद भट्ट ने थलकेदार की पहाड़ी पर डेरा डालकर अगस्त्योदय देखा है। पूर्व में भी सातूं-आठूं पर्व की तिथि पर विवाद होने पर बरसायत के प्रसिद्ध पंडित और तत्कालीन संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के प्राचार्य तारा दत्त पंत ने यहां आकर इसका समाधान निकाला था।
विषाड़ के पंडित दामोदर भट्ट, छाना के कैलाश पांडेय, बरसायत के गंगा दत्त पंत और नरेत के पं. पूरन चंद्र अवस्थी ने एक मत होकर कहा है कि विरूड़ा पंचमी दो सिंतबर को जन्माष्टमी के साथ मुक्ताभरण सप्तमी (सातूं) और तीन सितंबर को दूर्बाष्टमी आठूं होगी। उन्होंने सभी लोगों से उक्त तिथि पर ही सातूं-आठूं पर्व मनाने का अनुरोध किया है।