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अस्पताल सीएचसी, बोर्ड पीएचसी का, सुविधा कुछ नहीं

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नाचनी (पिथौरागढ़)। करीब 50 हजार लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए खोला गया तेजम अस्पताल खुद ही बीमार है। छह महीने पहले अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया, लेकिन अब तक डॉक्टर और अन्य स्टाफ के पद सृजित नहीं किए गए हैं। अस्पताल में बोर्ड भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लगा है। तीन डॉक्टरों में से एक भी अस्पताल में तैनात नहीं है। अस्पताल फार्मेसिस्ट के भरोसे चल रहा है।
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वर्ष 1962 में बने तेजम अस्पताल पर क्षेत्र की 50 ग्राम पंचायतों के साथ ही सीमावर्ती जिले बागेश्वर के कई गांवों वालों के स्वास्थ्य की देखभाल का जिम्मा है। दिसंबर 2017 में अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया, लेकिन उसके अनुरूप तैनाती तो दूर पद ही सृजित नहीं किए गए। लिहाजा अस्पताल अब भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तौर पर ही चल रहा है। अस्पताल में एक चिकित्सक संविदा पर तैनात था। मार्च से वह भी प्रशिक्षण अवकाश पर है। इन दिनों अस्पताल फार्मेसिस्ट के हवाले है। अस्पताल में चिकित्सक और स्टाफ की तैनाती न होने से लोगों को छोटी सी बीमारी के लिए भी 90 किमी दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।

वहीं, अस्पताल में दो फार्मेसिस्ट के स्थान एक तैनात है। एएनएम, स्टाफ नर्स के तीनों पद और वार्ड ब्वाय के चारों पद खाली हैं। स्वच्छक भी दो में से एक ही तैनात है। चार बिस्तर के इस अस्पताल के महिला वार्ड में वर्ष 2009 में आयुष विंग खोला गया, जो अब बंद हो गया है, लेकिन वार्ड अब भी इस्तेमाल हो रहे है। डिस्पेंसरी के लिए भी अस्पताल में काफी कम जगह है। अस्पताल भवन की छत क्षतिग्रस्त है।
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तेजम अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से शासन को अवगत कराया गया है। जल्द ही डॉक्टरों की तैनाती होने की उम्मीद है। -डॉॅॅ. ऊषा गुंज्याल, मुख्य चिकित्साधिकारी पिथौरागढ़
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