पिथौरागढ़। जल स्रोतों में सीवरेज निकासी करने वालों की अब खैर नहीं। इनके पानी के संयोजन काटे जाएंगे। हाइकोर्ट के हालिया आदेश के अनुपालन में मशीनरी हरकत में आ गई है। उत्तराखंड जल संस्थान ने इस संबंध में सभी अधिशासी अभियंताओं को पत्र जारी कर अनुपालन कराने को कहा है।
हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा, आलोक सिंह की खंडपीठ ने 12 दिसंबर 2017 को अजय गौतम बनाम भारत सरकार एवं अन्य से जुड़ी जनहित याचिका पर उपरोक्त आदेश जारी किए थे। आदेश के अनुसार जिलाधिकारियों को नदियों और उनके जल स्रोतों में अनिस्तारित सीवरेज डालने वाले सभी निर्माणों को चिन्हित करना था। इसमें रिहायशी बस्तियों के साथ ही होटल, उद्योग, व्यावसायिक संस्थान, आश्रम, डेरा आदि भवन निर्माण शामिल हैं। चिन्हीकरण के बाद दोषी पाए गए निर्माणों का बिजली, पानी और सीवरेज का संयोजन काटने एवं गंदगी फैलाने वाले निर्माणों को सील करने के आदेश भी दिए थे।
इसके बाद उत्तराखंड जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने सभी अधिशासी अभियंताओं को इस संबंध में पत्र जारी किया है। उन्हें चिन्हित अधिष्ठानों, प्रतिष्ठानों, संस्थानों आदि के निर्माण की जानकारी जुटाने के साथ ही जल संयोजन काटने के आदेश दिए हैं। अधिशासी अभियंताओं से संबंधित डीएम से संपर्क करने और चिन्हित निर्माण की जानकारी जुटाने का कहा गया है।
विद्युत वितरण खंड में नहीं कोई हलचल
हाइकोर्ट के आदेश के अनुपालन में जल संस्थान भले ही हरकत में आ गया है, लेकिन बिजली काटने के आदेश पर विद्युत वितरण खंड में कोई हलचल नहीं है। स्थानीय वितरण खंड को इस संबंध में मुख्यालय से कोई भी आदेश नहीं मिला है। इसके चलते बिजली संयोजन कटने के आदेश पर सवालिया निशान लगे हैं।
शासन ने गंदगी फैलाने वालों के बिजली, पानी संयोजन काटने की कार्रवाई के लिए कोई आदेश नहीं दिया है। इस संबंध में न्यायालय के आदेश के अवलोकन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। -सी रविशंकर, डीएम, पिथौरागढ़