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पिथौरागढ़ पालिका में वार्ड बढ़े, मतदाता घटे

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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ नगरपालिका में इस बार वार्डों की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव की तुलना में कम हो गई है। नगरपालिका ने मतदाता सूची बनाने के लिए घर-घर जाकर सर्वे का काम पूरा कर लिया है और मतदाताओं की सूची तैयार कर प्रकाशन के लिए पंचस्थानी चुनाव कार्यालय को सौंप दी है। जल्दी ही यह सूची प्रकाशित हो जाएगी।
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नगरपालिका में 2013 के चुनाव के समय कुल 15 वार्ड थे और उस समय मतदाताओं की संख्या 32873 थी, लेकिन इस बार नगरपालिका के विस्तारीकरण के बाद वार्डों की संख्या तो 20 हो गई, लेकिन मतदाताओं की संख्या 31320 रह गई है। पालिका के अधिकारियों का कहना है कि इस बार मतदाता सूची तैयार करते समय पूरी सावधानी बरती गई। नगर क्षेत्र में कई मतदाता ऐसे भी हैं, जिनके नाम गांव की मतदाता सूची में भी दर्ज है। ऐसे मतदाताओं के नाम नगर की सूची से हटाए गए हैं। किसी भी मतदाता को नगर निकाय या फिर त्रिस्तरीय पंचायतों में से किसी एक में वोट देने का अधिकार है। दो स्थानों पर मतदाता सूची में नाम वाले सभी वोटरों का नाम हटा दिया गया है।

नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी ने बताया कि हर वार्ड की मतदाता सूची का प्रकाशन शीघ्र हो जाएगा और नई मतदाता सूची के अनुसार ही पालिका के लिए मतदान होगा। उन्होंने कहा कि इस बार पिथौरागढ़ नगरपालिका में एक अध्यक्ष और 20 सभासदों का चुनाव होगा। पिछले चुनाव में मतदाताओं ने एक अध्यक्ष और 15 सभासदों का चुनाव किया था। अभी पालिका चुनाव की तिथि तय नहीं हुई है, लेकिन संभावित दावेदारों ने संपर्क अभियान शुरू कर दिया है। इस बार वार्डों की संख्या बढ़ने से पालिका का चुनाव रोचक होने की उम्मीद है।
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अध्यक्ष पद पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं
नगरपालिका अध्यक्ष का पद इस बार आरक्षित रहेगा या अनारक्षित, अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है। पिछले 15 वर्षों से अध्यक्ष पद पर सामान्य वर्ग का उम्मीदवार ही काबिज है। सूत्रों का कहना है कि रोटेशन के अनुसार इस बार पालिकाध्यक्ष का पद आरक्षित हो सकता है। बीच में यह भी चर्चा उड़ी थी कि यह पद महिला के लिए आरक्षित होने वाला है अलबत्ता शासन स्तर पर अभी इस संबंध में कोई फैसला नहीं हुआ है।

चुनाव की घोषणा होते ही सभी दलों के पत्ते खुलेंगे
पालिकाध्यक्ष के पद पर काबिज होने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रयास में हैं और इसके लिए दोनों दलों की रणनीति तैयार होने लगी है। यदि पद आरक्षित होता है तो दोनों दल उसी हिसाब से रणनीति बनाएंगे। भाजपा और कांग्रेस के अलावा उक्रांद, आम आदमी पार्टी भी इस बार अध्यक्ष पद पर दावेदार खड़ा करने की तैयारी में है। चुनाव की घोषणा होते ही सभी दलों के पत्ते खुल जाएंगे।
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