मदकोट (पिथौरागढ़)। दो जुलाई को आई आपदा से मदकोट के ढूनामानी और वल्थी गांव की ध्वस्त पेयजल योजनाओं का अब तक सुधार नहीं हो सका है। नतीजतन ग्रामीण पानी के लिए तरस गए हैं। गांव की बुजुर्ग महिलाओं को भी दो किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है।
ढूनामानी के जुगानी और छीनापानी तोक में 13 परिवार रहते हैं। इन परिवारों के लिए बनी पेयजल योजना दो जुलाई की रात आई आपदा में बह गई। ऐसे में 22 दिनों से यह ग्रामीण दो किमी दूर गधेरे से पानी ढो रहे हैं। गधेरे तक जाने के लिए भी रास्ता सुरक्षित नहीं है। एक ओर ऊपर से मलबा आने का खतरा, जबकि दूसरी ओर खाई है। जिन परिवारों में बुजुर्ग हैं, उन्हें भी जान जोखिम में डालकर पानी ढोना पड़ रहा है। यही हाल वल्थी के उम्ता और चमनाली तोक का भी है। उम्ता तोक के 25 परिवार, जबकि चमनाली के चार परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं।
यह परिवार गांव के एकमात्र नौले से पानी ढो रहे हैं। पूर्व प्रधान पूरन सिंह देवली ने बताया कि पेयजल योजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से सभी परिवार परेशान हैं। आधा दिन पानी जुटाने में ही बीत रहा है। मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करने में और अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं का शीघ्र सुधार करने की मांग की है।