धारचूला (पिथौरागढ़)। धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित गुंजी में उपचार नहीं मिलने से एक वृद्ध की मौत हो गई है। चिल बर्न और स्नो ब्लाइंडनेस से बीमार हुए दो ग्रामीणों को ले जाने के लिए दूसरे दिन भी खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर नहीं आ सका।
गुंजी गांव से हर साल माइग्रेशन पर जाने वाले परिवार सितंबर में लौट आते हैं। भेड़-बकरियों और घोड़ों को चराने वाले कुछ परिवार वहीं पर रुक जाते हैं। इस साल भी करीब 25 गरीब लोग गुंजी में ही रह रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित गुंजी में इस समय तीन से चार फीट बर्फ जमा है। वहां पर रह रहे 80 वर्षीय बीरा सिंह पुत्र नथुवा सिंह कुछ दिन पूर्व बीमार पड़ गए थे। धारचूला आने के लिए मार्ग बंद होने से साथी उन्हें उपचार के लिए नहीं ला सके। बताया जा रहा है कि दो दिन पूर्व हालत बिगड़ने पर जब आईटीबीपी और सेना के जवानों की मदद से बुजुर्ग को उपचार के लिए आईटीबीपी के मनीला स्थित कैंप में ले जाया जा रहा था तो बीरा सिंह ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पूर्व प्रधान जसमा गुंज्याल ने बताया कि सेना और आईटीबीपी के सहयोग से मृतक का गुंजी में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
उधर, चिल बर्न और स्नो ब्लाइंडनेस से बीमार हुए भूपेंद्र सिंह और ग्लोन गर्ब्याल को लेने के लिए मंगलवार को भी खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर नहीं आ सका। फिलहाल, गुंजी के आईटीबीपी कैंप में दोनों का उपचार चल रहा है। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।