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बदरीनाथ में तीर्थयात्रियों के लिए लगेगी प्रदर्शनी

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पिथौरागढ़। उत्तराखंड शोध संस्थान बदरीनाथ धाम के कुमाऊंनी धर्मशाला में युगयुगीन बदरीनाथ नाम से तीर्थयात्रियों के लिए ऐतिहासिक प्रदर्शनी लगाएगा। साथ ही मंदिर के कपाट खुलने के दिन संस्थान की ओर से बदरीनाथ के इतिहास की एक हजार प्रतियां पंडा को भेंट की जाएगी, जिससे कि श्रद्धालुओं को धाम की विस्तार से जानकारी मिल सके।
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उत्तराखंड शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉ. मदन चंद्र भट्ट ने बदरीनाथ में कुमाऊंनी पंडा को एक लाख रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने बताया कि संस्थान की बदरीनाथ में इकाई का गठन कर दिया गया है। इसमें डॉ. मदन चंद्र भट्ट अध्यक्ष, देहरादून के डॉ. राजेंद्र प्रसाद भट्ट उपाध्यक्ष, अल्मोड़ा के डॉ. चंद्र सिंह चौहान सचिव, बदरीनाथ के रामप्रसाद डिमरी कोषाध्यक्ष और पिथौरागढ़ के एडवोकेट निर्मल चौधरी को विधि परामर्शदाता बनाया गया है।

इनके अलावा देहरादून के डॉ. मुनिराम सकलानी, प्रो. सुनील कुमार सक्सेना, लोहाघाट के डॉ. योगेश चतुर्वेदी, हल्द्वानी के डॉ. विवेक पंत, पौड़ी के डॉ. यशवंत सिंह कटौच, कोटद्वार के डॉ. रणबीर सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है। डॉ. भट्ट ने बताया कि बदरीनाथ में कुमाऊं के कत्यूर राजाओं के चार विशाल ताम्रपत्र हैं।
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इनमें चमोली जनपद को तंगरापुर विषय और बागेश्वर को कार्तिकेयपुर विषय कहा गया है। उन्होंने बताया कि राजा ललितशूर (832-854 ई.) के समय बदरीनाथ की शीतकालीन पूजा गरुड़ के पास गढ़सेर में होती थी। बाद में राजा आसन्तिदेव ने 1300 ई. में जोशीमठ में शीतकालीन पूजा की व्यवस्था की।
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