मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। आपदा के तीन माह बाद भी क्षेत्र के कई गांवों के लोग पानी के लिए नौले, धारों की दौड़ लगाने को विवश हैं। इसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने ध्वस्त पेयजल योजनाओं को शीघ्र ठीक नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
आपदा के बाद कुछ ध्वस्त पेयजल योजनाओं में जल संस्थान और ग्रामीणों ने रबर के पाइप से जोड़कर वैकल्पिक व्यवस्था की थी। बावजूद इसके अब भी अधिकतर गांवों में समस्या बनी है। वर्तमान में नानासेम, दरांती, मिनाल गांव, रांथी, सुरिंग, दुम्मर, खसियाबगड़, जोशा, गांधीनगर, पापड़ी, सेविला, पैंकुति, मदकोट के आसपास, गोरीपार क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीण पानी के लिए नौले, धारों की दौड़ लगा रहे हैं।
जल संस्थान के सहायक अभियंता सत्यवान रावत ने बताया कि दैवी आपदा मद से 16 पेयजल योजनाओं के टेंडर हो गए हैं। ग्राम पंचायत की योजनाओं के संबंध में जल निगम के सहायक अभियंता शिवम द्विवेदी ने बताया कि मदकोट के आसपास की योजनाओं के टेंडर हो गए हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर पेयजल आपूर्ति सुचारु करने का प्रयास किया जाएगा।
चार माह में मात्र दो-तीन दिन पानी आया
मुनस्यारी के नानासेम निवासी किशन सिंह निखुर्पा ने बताया कि एक और दो जुलाई को आई आपदा के बाद से अब तक पेयजल किल्लत बनी है। जलसंस्थान कर्मियों को कई बार अवगत कराने पर चार माह में मात्र दो-तीन दिन पानी आया।
पानी लाने में ही अधिकतर समय बीत रहा
नई बस्ती निवासी तुलसी देवी का कहना है कि नलों में पानी नहीं आने से गधेरों से पानी लाना पड़ रहा है। अधिकतर समय इसी में बीत जाता है।
राइंका जोशा में पानी की किल्लत है
जोशा निवासी दीपा देवी का कहना है कि ग्राम पंचायत की लाइन वैकल्पिक तौर पर रबर के पाइप से चालू है। राइंका जोशा में पानी की किल्लत बनी हुई है।
अब पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है
घोरपट्टा निवासी मनोहर राम ने बताया कि आपदा के बाद से कुछ ही दिन नलों में पानी आया। अब पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप है।