पिथौरागढ़ । नगर से लेकर ग्रामीण इलाके में अभी से पेयजल समस्या सिर उठा रही है। लोगों को मांग की तुलना में 50 फीसदी पानी ही मिल पा रहा है। प्राकृतिक स्रोत लगातार सूख रहे हैं। पेयजल योजनाओं का डिस्चार्ज कम हो रहा है। कई योजनाएं समस्याग्रस्त पड़ी हैं।
जिले में गहराती पेयजल समस्या के इतर सरकारी मशीनरी की तैयारी अधूरी नजर आती है। पेयजल योजनाओं के हालात यह हैं कि बड़ी आबादी को रोजाना 46 से लेकर 72 लीटर पानी से गुजर करनी पड़ रही है। लोगों को पानी के लिए नौलों, धारों की शरण लेनी पड़ रही है। पेयजल समस्या से आमजन की दिनचर्चा बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पानी के इंतजाम में घंटों खर्च करने पड़ रहे हैं। गृहिणी, स्कूली छात्रों से लेकर नौकरी पेशा वाले लोगों को पानी के इंतजाम में नौलों, धारों से लेकर स्टैंड पोस्ट तक भटकना पड़ रहा है। इसके साथ ही पयर्टन, होटल कारोबारियों को चिंता सताने लगी है। पानी की किल्लत का असर कारोबार पर पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में हाल इतने विकट हैं कि घोड़ों-खच्चरों से पानी ढोना पड़ रहा है। लोग पानी खरीद कर प्यास बुझा रहे हैं। पेयजल समस्या को लेकर जिले भर के समस्याग्रस्त क्षेत्रों के निवासियों से बात की गई तो उनकी व्यथा खुलकर सामने आई।
समस्याग्रस्त नगरीय क्षेत्र
पिथौरागढ़, बेड़ीनाग, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, थल, नाचनी, गंगोलीहाट, कनालीछीना
समस्याग्रस्त ग्रामीण क्षेत्र
विण, मूनाकोट, खाकर सैनी, दौला, बुंगाछीना, अगन्या, खुलेती, ओलीगांव, दिगड़ा, चौसाली, लेकघाटी, सिंगाली, भागीचौरा, सूनाकोट, बाराकोट, घिंघरानी, जाजरदेवल, पंडा, सात शिलिंग, पलेटा, बगौर, दौली, मड़मानले, किरमोडिय़ा, पिपलकोटी, मुडौली, भौतड़ी, बडारी, सुनसेरा, नैकिना, भट्टी गांव, कोटली, ग्वासीकोट, नैनोली, पिल्खी, चहज, रौतड़ा, बडेना
प्रभावित होगा होटल, पर्यटन कारोबार
मार्च में ही सप्ताह भर बाद नल में पानी के दर्शन हो रहे हैं। कई दिनों इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। हैंडपंप और कुओं से पानी का बंदोबस्त कर रहे हैं। यही हाल रहा तो नगर में पर्यटन और होटल व्यवसाय पर बुरा असर पड़ेगा।
निशीत उप्रेती, कुजौली, पिथौरागढ़
स्कूल से पहले भरना पड़ता है पानी
घर के नल में कई दिनों तक पानी नहीं आता। जल संस्थान से टैंकर मंगाओ तो वह भी दिन-चार दिन से पहले नहीं आता। घर, बाहर का काम छोड़कर घंटों पानी के इंतजाम में खर्च करने पड़ते हैं। इससे काजेज की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।
पवन जोशी, जगदंबा कालोनी, पिथौरागढ़
ऊंट के मुंह में जीरा है टैंकर
हर साल पानी की समस्या गहराती है। गर्मी में पानी के लिए मारामारी तक मच जाती है। पेयजल विभाग के पास संभावित समस्या से निपटने के लिए ठोस उपाय नहीं हैं। टैंकर, पिकअप आदि किराए के वाहनों से आपूर्ति ऊंट के मुंह में जीरा है।
हयात गिरी, बजेटी, पिथौरागढ़
नहीं बदली गई पुरानी लाइनें
भारत-चीन व्यापारिक मंडी और कैलास यात्रा का बेस कैंप होने के बावजूद क्षेत्र में पेयजल की किल्लत है। बार-बार आवाज उठाने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। अभी ये हाल है तो मई-जून में हालात और बिगड़ सकते हैं।
अर्चना गुंजियाल, गूंजी, धारचूला
सड़क निर्माण की भेंट चढ़ी लाइन
कस्बे की पेयजल लाइन पीएमजेएसवाई सड़क निर्माण से टूट गई है। कई स्थानों पर लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। अभी तक इनकी मरम्मत नहीं हुई। नतीजन गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। कई किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है।
कृष्ण नपलच्याल, खोतिला, धारचूला
50 लीटर पानी भी नहीं मिल रहा
पेयजल कनेक्शन से रोजाना 50 लीटर पानी भी नहीं मिल पा रहा है। हैंडपंप और नौले से पानी ढोना पड़ रहा है। जल संस्थान टैंकरों से आपूर्ति नहीं करता है। पानी के इंतजाम में दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
तारा देवी, जमुना नगर, बेड़ीनाग