पिथौरागढ़। टनकपुर-पिथौरागढ़-धारचूला एनएच के लिए प्रस्तावित सल्मोड़ा बाइपास के सर्वे पर सवाल उठने लगे हैं। एनएच ने पूर्व में किए गए सर्वे को बदलकर दूसरी सड़क के निर्माण की कवायद शुरू कर दी है। वहीं, इसका विरोध भी शुरू हो गया है। प्रभावित जीबी के ग्रामीणों ने बाइपास के निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई है। उन्होंने डीएम से सर्वे बदलने की जांच की मांग की है।
एनएच के बाइपास के लिए पूर्व में घुंसेरागांव-सल्मोड़ा निर्मित सड़क पर सर्वे किया गया था। यहीं से एनएस का बाइपास प्रस्तावित था, लेकिन अब एनएच ने पूर्व के सर्वे को बदल दिया है। इस सड़क से 15 मीटर नीचे दूसरी सड़क के निर्माण का प्रस्ताव किया है। इसके लिए खाली भूमि का समरेखन भी कर दिया गया है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही निर्मित सड़क को छोड़कर दूसरी सड़क बनाने से अतिरिक्त सरकारी धन खर्च होगा। नए सर्वे में ग्रामीणों की बची हुई कृषि भूमि सड़क की जद में आ रही है, जबकि पहले ही ग्रामीण बाइपास निर्माण के लिए अपनी काफी भूमि दे चुके हैं।
ग्रामीणों ने डीएम को शिकायती पत्र देकर एनएच पर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव में सर्वे बदलने का आरोप लगाया है। हालांकि कार्यदायी संस्था ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। शिकायत करने वालों में प्रमोद चंद, हरीश चंद, योगेश चंद, आकाश चंद, नवीन चंद, गगन चंद आदि हैं। वहीं, डीएम सी रविशंकर का कहना है कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही बाइपास निर्माण का फैसला होगा।