पिथौरागढ़/डीडीहाट/झूलाघाट/अस्कोट। जिला मुख्यालय के नजदीक बांस की रामलीला में भरत-कैकेई संवाद का मंचन किया गया। इसके अलावा डीडीहाट एवं झूलाघाट की रामलीला में दशरथ-कैकेई संवाद के साथ राम, लक्ष्मण, सीता के वनवास जाने और अस्कोट की रामलीला में अंगद-रावण संवाद का मंचन किया गया।
बांस की रामलीला में भरत का माता कौशल्या से मिलना और भरत का कैकेई से राम को मनाकर वापस अयोध्या बुलाने का मार्मिक संवाद हुआ। भरत, कौशल्या समेत सभी अयोध्यावासी श्रीराम को मनाने जाते हैं, लेकिन श्रीराम पिता दशरथ द्वारा मां कैकेई को दिए वचन को पूरा करने की बात कहकर अयोध्या लौटने से मना कर देते हैं। भरत श्रीराम के खड़ाऊं को सिर पर रखकर अयोध्या लौट आते हैं। मुख्य अतिथि ठेकेदार कवींद्र खड़ायत, विशिष्ट अतिथि मड़ के सरपंच पुष्कर सिंह मेहता, मेडिकल स्टोर के स्वामी शंकर दत्त पाटनी मौजूद थे।
डीडीहाट की रामलीला में राजा दशरथ मंत्री सुमंत को राम के राज्याभिषेक के लिए पूरे नगर को सजाने का आदेश देते हैं। राजा दशरथ और मंत्री सुमंत की बातें सुनकर मंथरा कैकेई भवन को प्रस्थान करती है। मंथरा कैकेई को सारी बातें बताकर कहती है कि हमारे दुख का समय आ गया है। राजा दशरथ उनसे कोप भवन में होने का कारण पूछते हैं तो कैकेई कहती हैं देहु पिया मोहे वह वरदाना, देहुं कहेउं जो द्वि वरदाना, प्रथम राज देहुं भरत को, सकल सुमंगल राजसो जाई, राम जाए वन चौदह बरस को, वचन तुम आपनो पूर्ण कराई। कैकेई के मांगे वचनों से राजा दशरथ अर्द्धचेतना की अवस्था में चले जाते हैं। राम के राजतिलक की तैयारियां मातम में बदल जाती है।
वनवास को जाने से पहले राम लक्ष्मण और सीता राजवंश के कपड़ों को उतारकर जोगी का भेष धारण कर कहते हैं- उतारूं राज के कपड़े, बनाऊं भेष मुनियों का। दशरथ का किरदार राजकुमार और कैकेई का विपिन टम्टा ने निभाया। हारमोनियम वादक विपिन जोशी, तबला वादक कविंद्र बिष्ट थे। मुख्य अतिथि व्यापार संघ अध्यक्ष गोविंद लाल शाह थे। लोकेश भड़, पवन टोलिया, ओम प्रकाश वर्मा, लवराज जंगपांगी, प्रकाश बोरा आदि रामलीला में सहयोग दे रहे हैं।
झूलाघाट की रामलीला में दशरथ कैकई का संवाद होता है। कैकई राजा दशरथ से भरत को राजगद्दी और राम को 14 वर्ष वनवास भेजने का वचन मांगती है। पिता के दिए वर को पूरा करने के लिए भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के साथ वन को प्रस्थान करते हैं।
मुख्य अतिथि भाजपा के सांसद प्रतिनिधि गणेश भंडारी थे। अस्कोट की रामलीला में भगवान राम तीन दिन तक समुद्र के तट पर बैठकर समुद्र से लंका जाने के लिए मार्ग देने की आराधना करते हैं, लेकिन जब समुद्र से कोई जवाब नहीं मिलता तो भगवान राम क्रोधित हो जाते हैं और अग्निबाण चलाते हैं। समुद्र देव प्रकट होकर भगवान राम से अग्निबाण न चलाने का आग्रह करते हैं। तो भगवान राम कहते हैं गगन समीर अनल जल धरनी, इन कह नाथ सहज जल करनी। तब जामवंत राम से नल और नील से मिलने की बात करते हैं।
राम रावण के दरबार में अंगद को अपना दूत बनाकर भेजते हैं। भगवान राम की आज्ञा पाकर अंगद रावण दरबार पहुंचते हैं। रावण के दरबार में पहुंचे अंगद का रावण से संवाद होता है। रामलीला में मुख्य अतिथि भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक अजय नौटियाल, विशिष्ट अतिथि रनधीर चौबे थे।