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67 वर्ष बाद भी विद्यालय के प्रांतीयकरण की आस अधूरी

Fri, 24 Feb 2017 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़)।
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67 वर्ष बाद भी विद्यालय के प्रांतीयकरण की आस अधूरी - फोटो : अमर उजाला
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ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा देने के लिए 1950 में यहां मेलती में खोले गए हाईस्कूल का 67 वर्ष बाद भी प्रांतीयकरण नहीं हो पाया है। इस क्षेत्र के सबसे पुराने शिक्षण संस्थान की हालत यह हो गई है कि इसमें अब सिर्फ 65 विद्यार्थी रह गए हैं। आसपास के इलाकों में सरकार ने राजकीय इंटर कॉलेज और हाईस्कूल खोल दिए, लेकिन मेलती के इस पुराने विद्यालय के प्रांतीयकरण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
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1950 में स्थानीय लोगों के प्रयास से मेलती में प्राइवेट जूनियर हाईस्कूल खोला गया। 1962 में जिला परिषद ने विद्यालय को अपने अधीन ले लिया लेकिन 1973 में क्षेत्र के लोगों ने विद्यालय का संचालन जिला परिषद से हटाकर खुद ही करने का फैसला ले लिया। तब लोगों ने इंटर की कक्षाओं का संचालन भी किया लेकिन इंटर की कक्षाएं 1976 तक ही चल पाई। 1977 में मेलती में प्राइवेट तौर पर हाईस्कूल की कक्षाओं का संचालन हो रहा है।

सरकार ने विद्यालय को अर्धशासकीय की मान्यता दी और कर्मचारियों के वेतन की राशि सरकार से मिलने लगी। विद्यालय के पास 165 नाली जमीन है। इस विद्यालय में पहले मालाझूला, बरसायत, पमतोड़ी, देवकोली, दौलीकौली, खोली, भांतड़, भुलगांव, अटलगांव, भड़गांव, साता, कुकरौली, धिंगतड़, टोपराधार, देवली, चनकोट, लोतली, रजगोड़ा आदि गांवों के बच्चे पढ़ने आते थे। अब अधिकांश गांवों के बच्चों ने विद्यालय आना छोड़ दिया है। इसकी वजह यह है कि इन गांवों के नजदीक सरकारी स्कूल खुल गए हैं। क्षेत्र के लोग विद्यालय के प्रांतीयकरण की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। 
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अब प्रांतीकरण के लिए आंदोलन होगा
 मेलती निवासी भास्कर भट्ट का कहना है कि सरकार नए विद्यालय तो खोल रही है, लेकिन जनता के प्रयास से खुले विद्यालय के प्रांतीयकरण में उसे क्या परेशानी है समझ में नहीं आता। उन्होंने कहा कि विद्यालय का जल्दी प्रांतीयकरण नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। 

शिक्षा के सुधार पर ध्यान दे सरकार
मेलती निवासी सुरेश पंत का कहना है कि सरकार को शिक्षा के सुधार पर ध्यान देना चाहिए। आज स्थिति यह है कि सरकार की अनदेखी से गांवों में स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। सरकार शिक्षा के लिए भारी भरकम बजट तैयार करती है लेकिन उसका सदुपयोग कभी नहीं होता। 
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