पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ शहर में लावारिस कुत्ते आतंक का पर्याय बने हुए हैं। झुंडों में घूमने वाले कुत्तों के हमलों में अब तक एक मासूम बच्चे के साथ ही तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इन कुत्तों के कारण शाम ढलने के बाद सड़कों पर निकलना दूभर हो जाता है।
पिथौरागढ़ शहर में लंबे समय से लावारिस कुत्ते बड़ी समस्या बने हुए हैं। लावारिस कुत्तों ने तीन वर्ष पूर्व नैनीसैनी क्षेत्र में स्कूल को जा रहे एक मासूम बच्चे को बुरी तरह से काट दिया था। गंभीर रूप से घायल मासूम ने एसटीएच में दम तोड़ दिया था। इसके बाद पांडेगांव क्षेत्र में लावारिस कुत्तों के झुंड ने एक मजदूर पर हमला कर दिया था।
जान बचाने के प्रयास में नाले में गिरने से मजदूर की मौत हो गई थी। रई क्षेत्र में एक वृद्धा को कुत्तों ने बुरी तरह से काट दिया था। बाद में अस्पताल में वृद्धा की मौत हो गई थी। इसके बावजूद लावारिस कुत्तों से निजात दिलाने के प्रयास नहीं हो रहे हैं। शाम होने के बाद लोगों को सड़कों पर निकलना दूभर हो जाता है। देर शाम घरों को लौटने वाले व्यापारियों, अस्पताल से लौटने वाले तीमारदारों सहित अन्य लोगों को खतरा बना रहता है।
उधर, पिथौरागढ़ नगरपालिका के ईओ दीपक कुमार का कहना है कि लावारिस कुत्तों की समस्या है। इसको देखते हुए कुत्तों का बंध्याकरण किया जाना है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही लावारिस कुत्तों को पकड़कर बंध्याकरण किया जाएगा।
बछड़ों को खा जाता है कुत्तों का झुंड
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ शहर की सड़कों में सैकड़ों की संख्या में लावारिस कुत्ते झुंडों में घूमते हैं। यह कुत्ते इतने खूंखार हैं कि सड़कों में पशुपालकों द्वारा लावारिस छोड़े गए गायों के बछड़ों को खा जाते हैं।
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अस्पतालों में भी कुत्तों का डेरा
पिथौरागढ़। लावारिस कुत्ते अस्पतालों में भी डेरा डाले रखते हैं। जिला महिला अस्पताल और जिला अस्पताल परिसर में दिन भर कुत्ते घूमते रहते हैं। महिला अस्पताल में घूमने वाले लावारिस कुत्तों के कारण जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं के साथ ही शिशुओं को भी खतरा बना रहता है। यह कुत्ते रात में मरीज के साथ आए तीमारदारों को भी काटने दौड़ जाते हैं। ब्यूरो