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महाकाली पर पैदल पुल बनाया जाए

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धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत के पारंपरिक माइग्रेशन रूट एवं कैलाश यात्रा मार्ग क्षतिग्रस्त होने से जनजातीय समुदाय फंसे हैं। वहीं स्थानीय लोग मजबूरी में नेपाल-भारत के बीच अस्थायी पुल बनाकर जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं। इस बीच धारचूला के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल से महाकाली पर लखनपुर और नजंग में पैदल पुल बनाने की मांग की है। साथ ही पिछले साल की तरह मई से सीमांत के लिए हेली सेवा शुरू करने की भी मांग उठाई है।
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रं कल्याण संस्था के केंद्रीय संरक्षक एवं पूर्व मुख्य सचिव नृप सिंह नपलच्याल, महिमन गर्ब्याल, दरबान गर्ब्याल, अजय नबियाल, चंद्र सिंह ग्वाल, करण ग्वाल, महेंद्र बुदियाल की अगुवाई में धारचूला से गए प्रतिनिधि मंडल ने देहरादून में प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि लखनपुर से नजंग के बीच पैदल रास्ता पूरी तरह से बंद है।

इससे सदियों से पारंपरिक माइग्रेेशन करने वाले भारत-चीन सीमा के जनजातीय समुदाय धारचूला में ही फंसे हैं। सामान्यतया अप्रैल के प्रथम सप्ताह में माइग्रेशन शुरू हो जाता है। अंतिम सप्ताह में घोड़े, खच्चरों से सामान का ढुलान किया जाता है, लेकिन इस बार सीमा सड़क संगठन के सड़क निर्माण के दौरान भूस्खलन होने से कई सौ मीटर रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है। स्थानीय लोग नेपाल और भारत के बीच अस्थायी पुल बनाकर जानजोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। प्रभारी मंत्री ने मुख्य सचिव से वार्ता कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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