थल (पिथौरागढ़)। थल तहसील के संचालन की जिम्मेदारी इस समय पट्टी पटवारी के पास है। इस तहसील में अब तक तहसीलदार, नायब तहसीलदार की तैनाती नहीं हुई। सात माह पहले रजिस्ट्रार कानूनगो का स्थानांतरण हो गया था, तब से इस तहसील में कोई प्रमाणपत्र भी नहीं बन पा रहे हैं। तहसील के गठन से लोगों की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। शासन ने 30 सितंबर 2014 में थल तहसील के गठन की अधिसूचना जारी की थी और 13 जुलाई 2015 को तहसील अस्तित्व में आ गई।
थल तहसील में नौ पटवारी क्षेत्रों के 114 गांव शामिल किए गए। हाल ही में दस गांव इस तहसील से हटा दिए गए हैं। अब सत्यालगांव, चोपड़ा, भटीगांव, कोटगाड़ी, चिटगालगांव, थल, सिल्दो, उपराड़ाजाजर, आमथल पटवारी क्षेत्र के 104 गांव इसमें रह गए हैं। इस तहसील की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटवारियों के छह पद रिक्त चल रहे हैं। कानूनगो के दो पद खाली हैं।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार की अब तक तैनाती नहीं हुई। तहसील में फर्नीचर नहीं है। खाली पड़े दो सरकारी भवनों में तहसील का कामकाज चलाया जा रहा है। वर्ष 2016 में तहसील भवन के लिए जमीन का चयन कर दिया गया था, लेकिन अब तक भवन निर्माण की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। लोगों को तहसील संबंधी कामों के लिए रोज परेशान होना पड़ रहा है।
जनता को धोखे में रखा गया
थल निवासी दान सिंह बिष्ट का कहना है कि सरकार ने तहसील खोलकर जनता को धोखे में रखा है। जब तहसील के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं हो सकती थी तो खोलने की जरूरत क्या थी। अब जब तहसील खुल गई है तो सरकार को कर्मचारियों की शीघ्र तैनाती करनी चाहिए। वह कहते हैं कि जब तहसील में अधिकारी ही नहीं होंगे तो जनता के काम कैसे होंगे।
एसडीएम की शीघ्र तैनाती हो
थल निवासी महिपाल सिंह सत्याल का कहना है कि तहसील का कामकाज सही ढंग से संपन्न कराने के लिए एसडीएम की तैनाती होनी चाहिए। इसके अलावा तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सभी पट्टियों में पटवारी नियुक्त किए जाएं। उन्होंने कहा कि पहले लोगों ने तहसील के गठन के लिए आंदोलन किया था, अब रिक्त पदों को भरने के लिए आंदोलन किया जाएगा।