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रिवर राफ्टिंग सेंटर बनता तो ऋषिकेश को भी पछाड़ देता पिथौरागढ़

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पिथौरागढ़। काली और गोरी नदी के संगम स्थल जौलजीबी में रिवर राफ्टिंग सेंटर बनाने का सपना पांच साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। पांच करोड़ की लागत से बनने वाले इस रिवर राफ्टिंग सेंटर के निर्माण में 94 लाख रुपए खर्च होने के बाद शासन ने दूसरी किस्त जारी नहीं की है।
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जौलजीबी में पांच करोड़ की लागत से रिवर राफ्टिंग सेंटर में भवन, ओवरहोल टैंक, बाउंड्री वॉल, उपकरण रखने को स्टोर रूम, एसआर हट्स और सुरक्षा दीवार का निर्माण होना था। 2014 में निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में लगभग 94 लाख रुपये अवमुक्त हुए। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने प्रथम किस्त मिलने के बाद जौलजीबी में काली नदी किनारे भूमि चयन कर भवन का निर्माण कार्य शुरू किया।

अवमुक्त धनराशि में से बाउंड्री वॉल और सुरक्षा दीवार के अलावा भूमि के समतलीकरण सहित प्रारंभिक चरण का कार्य ही हो सका। पांच साल बाद भी दूसरी किस्त नहीं मिली है।
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यहां हो रही है राफ्टिंग...
काली नदी में जौलजीबी से झूलाघाट, झूलाघाट से पंचेश्वर, पंचेश्वर से बूम (टनकपुर) तक
जौलजीबी से बूम तक 165 किलोमीटर लंबी राफ्टिंग भी हो रही है
पिथौरागढ़ जिले की सरयू और रामगंगा नदियों में भी राफ्टिंग

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राफ्टिंग सेंटर का शीघ्र निर्माण किया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि विदेशी पर्यटकों का यह सबसे पसंदीदा स्थल है लेकिन सुविधाओं के अभाव में ज्यादातर साहसिक पर्यटक यहां नहीं आते हैं।
- दिनेश गुरुरानी, साहसिक पर्यटन प्रबंधक केएमवीएन

2014 में प्रथम किस्त मिलने के बाद जौलजीबी में रिवर राफ्टिंग सेंटर के प्रारंभिक चरण का कार्य किया गया। इसके बाद धनराशि नहीं मिली है। शासन से धनराशि मिलने पर ही राफ्टिंग सेंटर का शेष निर्माण कार्य होगा।
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- महेश उप्रेती, अभियंता केएमवीएन।
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