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छोटी जलधाराओं से मत्स्य बीज बड़ी नदियों में डाले गए

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पिथौरागढ़। जलाशय विकास योजना के तहत इस जिले की बड़ी नदियों में छोटी जलधाराओं से लाकर मत्स्य बीज डालने का काम शुरू हो गया है। छोटी जलधाराओं में मछलियों के विकसित होने की संभावना कम रहती है। छोटी जलधाराएं प्रदूषण का शिकार अधिक हो जाती हैं। रामगंगा, गोरी, सुवालेक नदी में मछली बीज डाले गए हैं। इनमें कतला, रोहू, सिल्वर कार्प, ग्राम कार्प, कॉमन कार्प प्रजाति की मछलियां शामिल हैं।

किसान संगठन के प्रदेश मंत्री नरेश जोशी ने कहा कि मछली पालन रोजगार का सबसे आसान तरीका हो सकता है। उन्होंने अपने हाथों मत्स्य बीजों को नदियों में छोड़ा। मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक एसएस शाही और ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक डॉ. रमेश सिंह चलाल ने लोगों से अपील की कि अनुचित तरीके से मछलियों का शिकार न किया जाए। नदियों में ब्लीचिंग पाउडर, बिजली का करंट या फिर विस्फोटक डालने की कोशिश न की जाए। मानव एवं पर्यावरण विकास समिति ने मछलियों के संरक्षण के लिए यह अभियान चलाया है।
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समाजसेवी मुन्ना गिरी ने कहा कि नदियों से अवैध रूप से होने वाले मछलियों के शिकार पर पूर्ण अंकुश लगाया जाना चाहिए। भूपाल बसेड़ा ने कहा कि सुवालेक नदी से होने वाले मछली के अवैध शिकार को रोकने के लिए प्रशासन को पहल करनी चाहिए। वहां बबलू गिरी, पंकज सिंह, करन सिंह, सरस्वती, दीप पाटनी, घनश्याम पंत, देवीदत्त पंत, भूपाल चंद, तारा चंद आदि थे।
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