धारचूला (पिथौरागढ़)। कांग्रेसी ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तिथि अब पांच नवंबर होने के कारण भाजपा और कांग्रेस ने क्षेत्र पंचायत सदस्यों की फिर से घेराबंदी शुरू कर दी है। अब सदन में मतदान के साथ-साथ दोनों दल इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई की तैयारी में भी हैं। 12 अक्तूबर को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान स्थगित होने के बाद दोनों दलों ने नए सिरे से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। शुक्रवार को सभी क्षेत्र पंचायत सदस्य अपने-अपने खेमों में चले गए हैं। अब पांच नवंबर तक सदस्यों की इसी तरह घेराबंदी की जाएगी।
बताया गया कि भाजपा ने अपने सदस्यों को पिथौरागढ़ पहुंचा दिया है। भाजपा का दावा है कि उसके पास 25 सदस्य हैं। इनमें ज्यादातर सदस्यों को बुलाकर पिथौरागढ़ ले जाया गया है। यह कोशिश की जा रही है कि कोई भी सदस्य कांग्रेस नेताओं के संपर्क में न आने पाए। सदस्यों को एकजुट करने की जिम्मेदारी संभाल रहे भाजपा जिला महामंत्री महेंद्र बुदियाल का दावा है कि पांच नवंबर को अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाएगा और नेत्र सिंह कुंवर को ब्लॉक प्रमुख का पद छोड़ना होगा। दूसरी तरफ कांग्रेस के सदस्यों को एकजुट कर रहे विधायक हरीश धामी ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने लगातार असंवैधानिक कार्य किए हैं और एक के बाद एक निर्णय बदले हैं।
26 सितंबर को ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद संशय की जो स्थिति पैदा हुई थी, वह अब तक समाप्त नहीं हो पाई है। अब लोगों को इसके लिए पांच नवंबर तक इंतजार करना पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा को संख्या बल के आधार पर अविश्वास प्रस्ताव गिरने की आशंका है, इसी कारण वह सत्ता का दुरुपयोग कर रोज फैसले बदल रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने कहा कि अंत में जीत न्याय की होगी और नेत्र सिंह कुंवर ब्लॉक प्रमुख बने रहेंगे।