पिथौरागढ़। हिमालय की तलहटी पर बसे नामिक में 5 जून से बिजली नहीं है। सूचना देने के बाद भी अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा सड़क, संचार, स्वास्थ्य की सुविधा भी इस इलाके में नहीं हैं। गुस्साए लोग इन सब समस्याओं को लेकर अब आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।
नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल, क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह जेम्याल ने क्षेत्र की अनदेखी पर रोष जताते हुए कहा कि गांव में बनी 50 किलोवाट की बिजली परियोजना में खराबी आ गई है। सूचना देने के बाद भी उरेडा बिजली परियोजना को ठीक नहीं कर रहा है। 15 सितंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बला नामक स्थान से नामिक के लिए बनने वाली 17 किमी लंबी सड़क का शिलान्यास किया, लेकिन अब तक नामिक की सड़क का काम शुरू नहीं हुआ है। भारत सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, लेकिन नामिक के 122 परिवार बगैर संचार सुविधा के दिन व्यतीत कर रहे हैं। कई आश्वासनों के बाद भी नामिक को संचार सेवा नहीं दी जा रही है।
नामिक में वर्ष 2012 में एएनएम सेंटर को मंजूरी दी गई, लेकिन अब तक एएनएम सेंटर शुरू नहीं हुआ। इस कारण यहां की गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को टीके नहीं लग पा रहे। नामिक हाइस्कूल में एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। जूनियर हाइस्कूल का शिक्षक कक्षाओं का संचालन कर रहा है।
ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य ने कहा कि 15 दिन का समय सरकार और सरकारी तंत्र को नामिक की समस्याओं के समाधान के लिए दिया जा रहा है। उसके बाद नामिक से 165 किमी दूर जिला मुख्यालय तक पैदल कूच किया जाएगा। पैदल कूच में गांव के बच्चे, बूढ़े भी शामिल रहेंगे। जिला मुख्यालय कूच की तिथि शीघ्र निकाली जाएगी।