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Pithoragarh News: 511 नौले-धारों और नदियों को जीवन देगा सारा, सूखते जल स्रोतों का बचेगा अस्तित्व

Fri, 13 Dec 2024 01:02 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

पिथौरागढ़ जिले में सूख चुके या सूखने के कगार पर पहुंच चुके नौले-धारों और नदियों को नया जीवन मिलेगा इसकी पहल शुरू हो चुकी है। स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन अथॉरिटी (सारा) परियोजना के तहत इन जल स्रोतों का वास्तविक प्रवाह लौटेगा। 
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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पिथौरागढ़ जिले में सूख चुके या सूखने के कगार पर पहुंच चुके नौले-धारों और नदियों को नया जीवन मिलेगा इसकी पहल शुरू हो चुकी है। स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन अथॉरिटी (सारा) परियोजना के तहत इन जल स्रोतों का वास्तविक प्रवाह लौटेगा। पहले चरण में जिले भर में 511 जल स्रोतों और सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए चुना गया है।
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सारा परियोजना के तहत सीमांत जिले में जलागम ने ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला स्तर पर ऐसे प्राकृतिक जल स्रोतों को चिन्हित किया है जिनका पूर्व में अस्तित्व मिट चुका है या फिर सूखने के कगार पर पहुंच चुके हैं। जलागम के मुताबिक 498 नौले-धारे और 22 सहायक नदियां ऐसी हैं जो पूरी तरह सूख चुकी हैं या 70 प्रतिशत से अधिक जल प्रवाह घटने से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं।

इन जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के साथ ही इनका वास्तविक प्रवाह लौटाया जाएगा इसमें सिंचाई, लघु सिंचाई, वन सहित अन्य विभागों की भागीदारी होगी। इन जल स्रोतों और सहायक नदियों के आसपास चाल-खाल, सिंचाई पिट, कच्चे तालाब, चैक डाम निर्माण के साथ ही पौधरोपण होगा। जलागम विभाग का दावा है कि अगले तीन साल के भीतर सूख चुके जल स्रोत फिर से अस्तित्व में आएंगे और सूखने की कगार पर पहुंच चुके स्रोतों और सहायक नदियों में फिर से जलधारा बढ़ेगी। सारा के तहत इसके लिए बजट मिलेगा।
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बारिश में कमी और जमीन का बंजर होना जल स्रोतों के सूखने का कारण
जलागम के तकनीकी विशेषज्ञ सुनील सती ने कहा कि लंबे समय से जल स्रोतों के सूखने और इनका प्रवाह कम होने के कारण तलाशे जा रहे थे। बताया कि इसका प्रमुख कारण बारिश में कमी, जमीन का बंजर होना और अनियोजित विकास है। पूर्व में अधिकतर भूमि पर खेती के लिए जुताई होती थी तो लंबे समय तक बारिश होने से भूमि के पानी सोखने की क्षमता अधिक थी। अवैज्ञानिक तरीके से सड़कों, भवनों के निर्माण के साथ ही अनियोजित विकास से भूमि के भीतर जलस्रोतों की जलधाराएं प्रभावित होने से इनके सूखने की गति तेज हो गई है। 

करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहीं लौट सकी यक्षवती वास्तविक स्वरूप में
जिला मुख्यालय के नजदीक रई क्षेत्र में बहने वाली यक्षवती नदी को इसके वास्तविक स्वरूप में लौटाने की वर्ष 2018 में पहल शुरू हुई। करोड़ों रुपये खर्च कर नदी के दोनों किनारों के साथ ही इसके उद्गम स्थल पर ट्रीटमेंट करने के साथ सैकड़ों पौधे रोपे गए। अब भी यह नदी अपने वास्तविक स्वरूप में लौटकर पुनर्जीवित नहीं हो सकी है। ऐसे में अब नौले-धारों और यक्षवती नदी के साथ ही अन्य सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने और इनमें जलप्रवाह बढ़ाने की शुरू हुई मुहिम को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।

सारा के तहत जिले में सूख चुके या सूखने के कगार पर पहुंच चुके जल स्रोतों और सहायक नदियों को नया जीवन मिलेगा। ऐसे जल स्रोतों का चिन्हीकरण किया गया है। जल्द ही काम शुरू होगा।
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- अजय कुमार, उपनिदेशक, जलागम, पिथौरागढ़।
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