राजकीय आदर्श विद्यालय पतेत में छात्रसंख्या लगातार कम हो रही है। शिक्षकों की कमी के कारण पिछले दो साल में 50 विद्यार्थियों ने विद्यालय से नाम कटा दिया है। इस समय हालत यह है कि आठ कक्षाओं को पढ़ाने के लिए सिर्फ दो शिक्षक कार्यरत हैं। प्राथमिक स्तर में पढ़ाने के लिए दो साल से शिक्षक ही नहीं हैं।
तेजम का यह विद्यालय 250 की छात्रसंख्या के साथ वर्ष 1962 में खुला था। तब सरकार ने इसे आदर्श विद्यालय का दर्जा दिया और एक साथ कक्षा एक से आठ तक की कक्षाओं के संचालन के लिए सात शिक्षकों के पद सृजित किए, लेकिन बाद में एक-एक कर शिक्षकों ने यहां से अपना स्थानांतरण करा लिया और उनकी जगह नए शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई। इस कारण वर्तमान में इस विद्यालय में सिर्फ दो शिक्षक ही रह गए हैं और छात्रसंख्या 49 पर सिमट गई है, जबकि 2015 में यहां पर 99 छात्र अध्ययनरत थे।
इन दो वर्षों के अंदर 50 बच्चों ने विद्यालय से नाम कटाया। कक्षा एक में तो केवल तीन बच्चों ने प्रवेश ले रखा है। प्रधानाचार्य शशिकला सत्याल का कहना है कि शिक्षकों की कमी से कक्षाओं के संचालन में दिक्कत आ रही है। वर्ष 2015 में जब शासन ने प्रदेश में आदर्श विद्यालयों की स्थापना की थी तब पतेत के स्कूल को फिर से यह तमगा तो दे दिया, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया।
यह बच्चों के साथ खिलवाड़
पतेत निवासी कमल कन्याल का कहना है कि विद्यालय की अव्यवस्था पर न तो अधिकारियों और न सरकार को कोई चिंता है। यह सरासर अभिभावकों और बच्चों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि आदर्श विद्यालय में क्या इसी तरह की सुविधाएं होती हैं, इस पर गौर करने की जरूरत है।
अब आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे
पतेत निवासी मोहन राम का कहना है कि अब अभिभावक आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। आखिर दो शिक्षकों के सहारे कैसे विद्यालय का संचालन होगा, यह सोचने वाला विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग को एक महीने का समय दिया जाएगा, फिर आंदोलन किया जाएगा।