पिथौरागढ़। रोडवेज की परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पिथौरागढ़ डिपो को लंबे समय से 50 चालकों की जरूरत है। हैरानी है कि निगम ने सिर्फ तीन चालक भेजकर जिम्मेदारी निभा दी। ऐसे में डिपो के लिए सभी रूटों पर बसों का संचालन करना चुनौती बन गया है इसकी मार यात्री सह रहे हैं। हालात यह है कि चालकों की कमी से आए दिन विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन रोकना पड़ रहा है और यात्री टैक्सी में सफर करने के लिए मजबूर हैं।
पिथौरागढ़ डिपो को पर्वतीय तथा मैदानी क्षेत्रों के रूटों पर निर्बाध रूप से बस सेवाओं के संचालन के लिए रिलीवर के तौर पर 20-20 चालकों की जरूरत है। वहीं टेंपो ट्रैवलर के संचालन के लिए 10 चालक चाहिए। 50 के सापेक्ष कुछ रोज पूर्व आउटसोर्स के जरिये डिपो को तीन चालक देकर निगम ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
ऐसे में वर्तमान में कार्यरत चालकों को रिलीवर मिलना मुश्किल हो रहा है। उपलब्ध चालकों के अवकाश पर आने से आए दिन दिल्ली, टनकपुर, देहरादून सहित विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन रोकना डिपो की मजबूरी बन गया है। बसों का संचालन ठप होने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मजबूरन यात्रियों को टैक्सी से सफर करना पड़ रहा है।
चालकों की कमी से इन मार्गों पर सेवा हो रही बाधित
चालकों की कमी से आए दिन विभिन्न रूटों पर बस सेवाएं बाधित हो रही हैं। इनमें पांगला-बरेली, सेराघाट-दिल्ली, देहरादून द्वितीय सेवा, हरिद्वार के अलावा टनकपुर अप-डाउन, धारचूला अप-डाउन, मुनस्यारी-दिल्ली और धरमघर-दिल्ली सेवा शामिल हैं।
कोट
डिपो को जल्द ही चालक मिलने वाले हैं। आज भी एक चालक आया है। सभी रूटों पर सेवा सुचारू करने का प्रयास किया जा रहा है। - रविशेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़