पानी भरपूर होने के बाद भी डीडीहाट, धारचूला और बेड़ीनाग में पानी का संकट गहरा गया है। नई योजनाओं के धरातल पर न उतरने और पेयजल लाइनों की पर्याप्त देखरेख न होने का ही सबब है कि गर्मियों से पहले ही इन क्षेत्रों में लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
डीडीहाट नगर की 15 हजार की आबादी के लिए प्रतिदिन दो एमएलडी पानी की आवश्यकता है। इसके सोपक्ष 0.690 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो रही है। थल रामगंगा नदी से पंपिंग योजना अभी अधूरी है। भागीचौरा क्षेत्र के गांवों की प्यास बुझाने के लिए करीब 15 किमी लंबी ननकुड़ी-चौसाल पेयजल योजना है। यह आए दिन क्षतिग्रस्त होती रहती है। इसके चलते दर्जनों गांवों में पेयजल की समस्या विकट है। वनराजि गांव मदनपुरी में पिछले वर्ष आपदा में पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो गई थी।
इसी तरह धारचूला में 16 हजार की आबादी के लिए प्रतिदिन 2.160 एमएलडी पानी की मांग है। इसके सापेक्ष 1.750 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो पा रही है। बेड़ीनाग नगर की 13180 की आबादी की प्यास बुझाने के लिए रोज 1.779 एमएलडी मांग के सापेक्ष महज 0.211 एमएलडी पानी ही उपलब्ध है। जल संस्थान डीडीहाट में 74, बेड़ीनाग में 43, मुनस्यारी में 74 और धारचूला में 101 कुल 292 योजनाओं का संचालन कर रहा है। इन जगहों पर 349 हैंडपंप भी लगे हैं।
सुंदरीनाग मंदिर में खच्चरों से पहुंचाया पानी
नाचनी (पिथौरागढ़)। पानी की व्यवस्था न होने का ही सबब है कि तल्ला जोहार के सुंदरीनाग मंदिर में खच्चरों के जरिए पानी पहुंचा कर श्रद्धालुओं की प्यास बुझाई जा रही है।
हुपली से पांच किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर 1800 मीटर की ऊंचाई में बांज के जंगलों के बीच सुंदरीनाग का मंदिर स्थित है। मंदिर में तल्ला जोहार के डेढ़ दर्जन गांव हुपली, भैंसकोट, तल्ला भैंसकोट, बाथी, कोट्यूड़ा, नाचनी, घटगोटगाड़ी, चामी भैंसकोट, बासानी, धामी फल्यांटी, बोरा गांव आदि के सैकड़ों ग्रामीण दो दिन से नाग देवता की पूजा कर रहे हैं। प्रधान गोविंद सिंह चुफाल ने बताया कि जल निगम की ओर से पांच खच्चरों के जरिए मंदिर में पानी पहुंचाया जा रहा है।