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मिट्टी में मिला दिए 44 करोड़

Wed, 01 Nov 2017 10:35 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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सातशिलिंग-थल सड़क पर कौलपानी के पास पड़ा बड़ा गड्ढा - फोटो : अमर उजाला
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44 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 50 किमी सातशिलिंग-थल सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील होने के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई है। इस सड़क के लिए वर्ष 2014 में केंद्रीय सड़क निधि से राशि मिली थी, जिसे सड़क बनाने वाली कार्यदायी संस्था एशियन डेवलपमेंट बैंक ने मिट्टी में मिला दिए। सड़क न तो मानकों के अनुसार चौड़ी की गई है और नहीं सड़क पर कहीं डामर नजर आ रहा है।
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शासन से वर्ष 2014 में स्वीकृत हुई सातशिलिंग-थल सड़क को दिसंबर 2017 में पूरा करने का लक्ष्य है। इस सड़क पर वर्ष 2015 से काम शुरू हुआ, लेकिन इस सड़क पर गुणवत्ता की जमकर अनदेखी की गई। इस सड़क की दुर्दशा सातशिलिंग से ही शुरू हो जाती है। देवलथल, मेलापानी, बुंगाछीना समेत कई स्थानों पर सड़क को चौड़ा नहीं किया गया। डेढ़ साल पहले डामरीकरण के नाम पर केवल लीपापोती की गई। सड़क पर डामर की इतनी पतली परत बिछाई गई कि अब उसके निशान भी सड़क पर बाकी नहीं है। बुंगाछीना के अलावा मुवानी से आगे कई स्थानों पर तो डामरीकरण हुआ ही नहीं है। इस कारण सड़क पर गड्ढे पड़ने लगे हैं, जिनसे हर समय दुर्घटनाओं का खतरा रहता है।

वैसे बुंगाछीना के पास सड़क बेहद खराब हालत में है। यहां पानी की निकासी के लिए कॉजवे नहीं बनाया गया है। इस कारण पानी सड़क पर बहता रहता है और वाहन रपटते हैं। ऐसी हालत 50 किमी किमी लंबी सड़क पर लगभग हर जगह नजर आती है। कौलपानी के पास सड़क पर पड़े गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं। मुवानी के पास स्क्रबर क्षतिग्रस्त होने से बीच सड़क पर गड्ढा पड़ा है। हालांकि, स्थानीय लोगों ने गड्ढे के ऊपर पत्थर रख दिए हैं, ताकि इससे हादसा न हो। इस घटिया काम का 70 फीसदी से अधिक का भुगतान हो चुका है।
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कमिश्नर के आदेश पर हुई जांच
पिथौरागढ़। अमर उजाला ने घपलेबाजी के इस मामले को लगातार उठाया था। इस पर एक साल पहले तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने सातशिलिंग-थल सड़क पर हुए घटिया काम की जांच कराने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए थे। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में टीम गठित की। जांच में घपले की पुष्टि होने की बात सामने आई है। अलबत्ता जांच रिपोर्ट अभी शासन में लंबित है। कार्रवाई हुई तो ठेकेदार के साथ ही कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों की गर्दन नपना तय है।

सातशिलिंग-थल सड़क की जांच में घपलेबाजी की पुष्टि हुई है। काफी समय पहले जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन स्तर पर कार्रवाई गतिमान है। इस मामले में घपलेबाजी में लिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर एडीबी डिवीजन को करनी है। घपलेबाजी में जो भी लिप्त है, उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। -सी रविशंकर, जिलाधिकारी पिथौरागढ़

उन्होंने हाल में सातशिलिंग-थल सड़क की विजिलेंस जांच के लिए शासन को पत्र लिखा है। ठेकेदार को काम से अधिक भुगतान करने की बात स्पष्ट हुई है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। -एके गोयल, अधीक्षण अभियंता, एडीबी डिवीजन।
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