देवीसूना गांव की टूटी पेयजल लाइन
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तीस जून और एक जुलाई की आपदा के बाद इस तहसील के दर्जनों गांवों में पेयजल व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। ग्रामीणों को पानी के लिए दो किमी दूर प्राकृतिक स्रोत तक जाना पड़ रहा है। कुछ गांव वाले बारिश के पानी को उबाल कर पी रहे हैं। जल संस्थान के ईई बिलाल यूनुस ने बताया कि आपदा के समय ग्रामीण अंचलों की 42 पेयजल योजनाएं ध्वस्त हुई हैं।
देवीसूना के क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश कन्याल ने बताया कि एक जुलाई को भारी बारिश से मौगड़ा, चौनला, बसौरा, कफलुआ, ईजर में पानी की सारी पाइप लाइनें आपदा की भेंट चढ़ गई हैं। नारायणनगर लिफ्ट पेयजल योजना के एक जुलाई से बंद होने से कांडामानसिंह, नारायणनगर, मिर्थी के 800 परिवारों के सामने पानी का संकट गहरा गया है। नारायणनगर के दीपक कन्याल ने बताया कि लोग बारिश के पानी को उबाल कर पीने योग्य बना रहे हैं।
दूनाकोट के कुणिया, सौकुणा, बोरागांव, महरगाड़ी, बाईगांव, भाड़ीतोक, वर्नाऐरी, मटेना, बांकू, तवाबगड़, आदिचौरा के हुमकापिटा, चुपड़ाखेत, सुनारखेत सहित दर्जनों गांवों में पानी का भीषण संकट पैदा हो गया है। जल संस्थान के ईई ने बताया कि एक जुलाई की आपदा से विभाग को 1 करोड़ 45 लाख रुपये का नुकसान हो गया है। पेयजल योजनाओं की मरम्मत में अभी समय लगेगा।