पिथौरागढ़/गंगोलीहाट। सीमांत वसंतोत्सव में शामिल होने के लिए गंगोलीहाट से आया मां महाकाली का डोला आयोजन की शुरुआत से पहले रात में ही लौट गया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ने मैया के आदेश पर डोला वापस ले जाने की बात कही है। हालांकि रविवार की रात डोला वापस ले जाते समय मंदिर कमेटी ने व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। डोले को वसंतोत्सव के समापन 24 फरवरी तक आयोजन स्थल पर रहना था।
रविवार को कुमाऊं की आराध्य देवी मां महाकाली के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद डोला पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुआ। डोले में मां काली की शक्ति की प्रतिकृति बनाई गई थी। कई वाहनों के काफिले के साथ मां महाकाली का डोला देर शाम 7.58 बजे आयोजन स्थल रामलीला मैदान पहुंचा। पहले से इंतजार कर रहे सैकड़ों लोगों ने मां भगवती के डोले पर पुष्प, अक्षत बरसाकर पूजा की। रामलीला मैदान में बने पंडाल में डोला रखा गया, शयन आरती हुई। डोले के साथ आए लोग आयोजकों के भोजन पंडाल देवसिंह मैदान की ओर चले गए।
रात करीब 10 बजे महाकाली मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र रावल ने मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों को फोन कर रामलीला मैदान बुलाया और कहा आयोजकों की ओर से मां काली के डोले को उचित सम्मान नहीं मिला है, मंदिर के पंडा और महात्मा के भोजन और बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं की है। मां का आदेश है डोला वापस ले चलो। डोला वापस ले जाने की तैयारी शुरू हो गई।
डोला वापस ले जाने की सूचना पर आयोजन समिति के संयोजक राकेश देवलाल, ललित पंत, भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया, जिला महामंत्री गिरीश जोशी, भगवान पंत ने डोला वापस न ले जाने का आग्रह किया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष डोला वापस ले जाने की बात पर अडिग रहे। उन्होंने आयोजकों के सामने व्यवस्था का मामला उठाया। रात करीब 11 बजे डोला वापस गंगोलीहाट को रवाना हो गया।
सोमवार को मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र रावल ने मंदिर कमेटी के लोगों को डोला वापस लाने के पीछे मां महाकाली का आदेश होने की बात बताई है। कहा है कि पिथौरागढ़ में जब डोला रखा गया था तो एक सफेद कपड़े पहने छाया दिखी। छाया ने क्रोधित होकर वहां से ले जाने को कहा। मन का वहम समझ कर अनदेखा कर दिया। उसके बाद फिर वैसा ही हुआ। इस कारण डोला वापस लेने का फैसला लिया। रावल का कहना है कि पिथौरागढ़ में सबके सामने यह वाकया बताना उन्होंने उचित नहीं समझा। सोमवार को महाकाली मंदिर में डोले की पुनर्स्थापना की गई।
उत्सव, समारोहों में डोले लाना परंपरा के विपरीत
पिथौरागढ़/गंगोलीहाट। पूर्व दर्जा राज्य मंत्री एडवोकेट रमेश कापड़ी ने वसंतोत्सव में देवी, देवताओं के डोले लाने को परंपरा के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि किसी भी प्रतिष्ठित मंदिर का डोला विशेष पर्वों पर ही उठता है, वह भी मंदिरों में ही। किसी उत्सव, समारोह में देवी, देवताओं के डोले लाने की परंपरा नहीं है। कई शक्तिपीठों में तो डोले भी नहीं उठते।
21 को निकलेगा मोष्टा देवता का डोला
पिथौरागढ़। सीमांत वसंतोत्सव में 21 फरवरी को छह पट्टी सोर के आराध्यदेव भगवान मोष्टामानू का डोला आएगा। मोष्टामानू मंदिर कमेटी के सचिव नीलांबर गुरुरानी ने बताया कि बुधवार को सुबह 10 बजे मोष्टामानू से ढोल, नगाड़ों के साथ डोला रामलीला मैदान पिथौरागढ़ के लिए रवाना होगा।
बच्चों को घंटों खड़े रखने पर उठाए सवाल
पिथौरागढ़। युवक कांग्रेस के विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष ऋषेंद्र महर ने सीमांत वसंतोत्सव के वंदेमातरम कार्यक्रम के लिए कई घंटे तक विद्यार्थियों को खड़े रखने पर सवाल खड़े किए हैं। कहा है कि 11000 विद्यार्थी सुबह 9.30 बजे से 1 बजे तक स्टेडियम में खड़े रह्रे। उनके लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं थी।