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ठगी में सेना के जवानों की संलिप्तता तो नहीं

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पिथौरागढ़। सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह में कहीं सेना का कोई जवान तो शामिल नहीं है, पुलिस अब अपनी जांच को इस दिशा में केंद्रित कर रही है। ठगी करने वाले तीन लोगों की रविवार को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। पुलिस सबसे पहले राजेश नाम के उस व्यक्ति तक पहुंचना चाहती है जो पकड़े गए एक ठग कैलाश सिंह शाह को सेना भर्ती कार्यालय के आसपास मिला था। पुलिस का मानना है कि अभी जांच में कुछ और खुलासे होंगे।
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पुलिस क्षेत्राधिकारी शेखर सुयाल ने इस मामले की जांच की कमान संभाल रखी है। उन्होंने कहा कि पकड़े गए तीनों ठगों ने यह धंधा पिछले साल से शुरू किया था। पिछले साल भी उन्होंने कई युवाओं को अपने झांसे में लिया था और छह युवाओं से पैसे ऐंठने में कामयाब हो गए थे। इस बार उन्होंने दस युवाओं के कागजात अपने पास जमा कराए थे। यदि यह सभी युवा लिखित परीक्षा में पास होकर सेना में भर्ती हो जाते तो ठग अच्छी-खासी रकम बना लेते। हर युवा से 2.5 लाख रुपये में बात की गई थी।

पुलिस ने पकड़े गए रवींद्र सिंह धामी, मनीष धामी और कैलाश सिंह शाह को जेल भेज दिया है। इनके खिलाफ धारा 120 (बी) और 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सीओ ने बताया कि इस मामले की सभी परतों को खोलने के लिए पुलिस ने योजना तैयार कर ली है। सेना के अधिकारियों से भी इस संबंध में बात की जा रही है।
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एसपी अजय जोशी का कहना है कि यह एक आपराधिक षड्यंत्र है और युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश की गई है। तीनों आरोपी बेहद शातिर किस्म के हैं। वह अपने शातिर व्यक्तित्व से किसी को भी अपने प्रभाव में ले लेते हैं। गांव के युवा ऐसे लोगों के झांसे में बहुत जल्दी आ जाते हैं।

दूरदराज इलाके के युवाओं पर डालते रहे डोरे
सेना में भर्ती कराने का झांसा देने वाले गिरोह के लोग दूरदराज इलाकों के युवाओं को ही सबसे पहले निशाने पर रखते थे। इस बार इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने वाला युवक मुनस्यारी तहसील के दूरस्थ उछेती गांव का रहने वाला है। बताया गया कि उसके साथ जिन पांच अन्य युवाओं ने पुलिस में शिकायत की, वह भी दूरदराज गांवों के ही हैं। दूरदराज इलाकों के युवा शहरी तड़क-भड़क वाले लोगों के प्रभाव में बहुत जल्दी आ जाते हैं।

पहाड़ के युवाओं की सेना में भर्ती पहली वरीयता
पहाड़ के अधिकतर युवा सेना में भर्ती होने को ही अपनी प्राथमिकता में रखते हैं। इंटर पास करने के बाद अधिकतर मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों के युवा सेना में भर्ती का प्रयास शुरू कर देते हैं। सेना में नहीं चुने जाने पर यह युवा अर्धसैनिक बलों, पुलिस में भी भाग्य आजमाते हैं। अपनी बेहतर शारीरिक क्षमता के बल पर ज्यादातर युवा सेना में नौकरी पाने में सफल हो जाते हैं।

युवाओं में इस घटना से बड़ा संदेश गया
ठगी की इस घटना से युवाओं में बड़ा संदेश यह गया है कि कम से कम सेना की भर्ती में किसी बाहरी व्यक्ति का कोई दखल नहीं चल सकता। सेना अपने नियमों के आधार पर ही शारीरिक, चिकित्सा परीक्षण और लिखित परीक्षा कराती है। सेना की ओर से बार-बार यह भी कहा जाता रहा है कि दलालों के चक्कर में न पड़ें। अब भविष्य में होने वाली सेना भर्ती रैली के समय युवा ज्यादा सजग और सतर्क हो जाएंगे और इस तरह के तत्वों के चंगुल में आने से बच जाएंगे। पुलिस के अधिकारी भी यही कहते हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने में युवाओं की सजगता बेहद जरूरी है।
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