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जिले में मलेरिया के इलाज की दवा नहीं

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पिथौरागढ़। जिले में सरकार की मलेरिया उन्मूलन की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। यहां मलेरिया के इलाज की दवा तक नहीं है। किसी को मलेरिया हो जाए तो रुद्रपुर से दवा मंगानी पड़ेगी। दूसरी ओर मलेरिया उन्मूलन अधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इससे सामान्य कामकाज तक प्रभावित हो रहा है।
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पिथौरागढ़ जिले में अगर किसी को मलेरिया हो जाए तो रुद्रपुर से दवा मंगानी पड़ेगी। रुद्रपुर से जिला मुख्यालय में ही दवा पहुंचने में कम से कम 10 घंटे लगेंगे। जिले के अन्य स्थानों में दवा पहुंचने में और वक्त लगेगा। हालांकि मलेरिया उन्मूलन विभाग नई ड्रग नीति में बदलाव के चलते दवा स्टोर न होने की दलील दे रहा है।

दूसरी ओर विभाग में वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक, दो निरीक्षकों और सहायक जिला मलेरिया अधिकारी का पद भी खाली है। इससे सामान्य प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। प्रशासनिक और फील्ड का सारा कामकाज अकेले जिला मलेरिया अधिकारी पर है। मलेरिया विभाग के पास खुद का वाहन और चालक तक नहीं है। जरूरत पर मलेरिया अधिकारी सीएमओ के वाहन पर निर्भर हैं।
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सरकार की इस अधूरी तैयारी के इतर शुक्र है कि जिले में मलेरिया की स्थिति नियंत्रण में है। जिला अस्पताल के साथ ही पीएचसी, सीएचसी में जांच की मुफ्त सुुविधा उपलब्ध है। संदिग्ध रोगियों की जांचें कराई जाती हैं। मलेरिया उन्मूलन के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। अलबत्ता पिछले तीन सालों से जिले में मलेरिया का कोई मरीज रिपोर्ट नहीं हुआ है।

नई नीति के चलते दवा स्टोर नहीं है। जरूरत पड़ने पर रुद्रपुर केंद्र से दवा मंगाई जाएगी। रिक्त पदों के संबंध में मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है। -जेपी कश्यप, जिला मलेरिया अधिकारी, पिथौरागढ़
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