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नौ दिनों में 98 करोड़ ठिकाने लगाने की तैयारी

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पिथौरागढ़। वित्तीय वर्ष के साढ़े 11 माह गुजरने के बाद भी कई विभाग आधा बजट तक खर्च नहीं कर पाए हैं। जिला, राज्य, केंद्र की योजनाओं में अब तक 98 करोड़ की रकम डंप पड़ी है, जबकि खर्च करने को महज नौ दिन बचे हैं। इससे बजट के लैप्स होने और योजनाओं में कटौती का खतरा बना है। ऐसा होने पर योजनाओं का काम प्रभावित होगा और अगले वित्तीय वर्ष में योजनाओं के लिए फंडिंग में दिक्कत आ सकती है। वहीं, इससे बचने के लिए विभाग वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में बजट ठिकाने लगाने की कसरत में जुट गए हैं।
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वित्तीय वर्ष में अब तक राज्य योजना में 45 करोड़, केंद्रीय योजनाओं में 44 करोड़, जबकि जिला योजना में नौ करोड़ से अधिक रकम डंप पड़ी है। कई विभाग आधा बजट तक खर्च नहीं कर पाए हैं। कुछ विभाग ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस साल बजट को हाथ तक नहीं लगाया। वहीं, जिला योजना की पूरी राशि खर्च न करने पर लैप्स हो सकती है, जबकि राज्य और केंद्रीय योजनाओं में पूरा बजट खर्च न होने पर योजनाओं में कटौती हो जाएगी।

सामुदायिक विकास, साहसिक पर्यटन में एक रुपया तक खर्च नहीं हुआ
जिला योजना में 43 विभागों में से 13 विभाग ही सौ फीसदी बजट खर्च कर पाए हैं, जबकि सामुदायिक विकास, साहसिक पर्यटन में एक रुपया तक खर्च नहीं हुआ है। चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने अब तक बजट का 45 फीसदी ही खर्च किया है। सबसे फिसड्डी लोनिवि पिथौरागढ़ और डीडीहाट 30 से लेकर 35 फीसदी पर अटके हैं। साढ़े 11 माह में जिला योजना में औसतन 75 फीसदी धन खर्च हुआ है। नौ दिन में 25 फीसदी बजट खर्च किया जाना है। इसी तरह राज्य योजना के 42 विभागों में से महज नौ ही सौ फीसदी बजट खर्च कर पाए हैं। अटल आवास योजना, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक कल्याण, अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना मद में भी एक रुपये का काम नहीं किया गया है। साढ़े 11 माह में पशुपालन, जल निगम गंगोलीहाट और डीडीहाट 40 फीसदी बजट तक खर्च नहीं कर सके हैं। राज्य योजना में औसतन लगभग 79 फीसदी बजट खर्च हुआ है। नौ दिन में 21 फीसदी बजट खर्च किया जाना है। इसी तरह केंद्रीय योजनाओं में शामिल 36 विभागों में से महज आठ ही सौ फीसदी बजट खर्च कर सके हैं। पिथौरागढ़, गंगोलीहाट जल निगम, स्वजल, लोनिवि डीडीहाट अब तक 40 फीसदी बजट भी खर्च नहीं कर सके हैं। कृषि विभाग भी लगभग 50 फीसदी बजट ही खर्च कर पाया है। राज्य योजना में साढ़े 11 माह में औसतन 84 फीसदी बजट खर्च हुआ है। केंद्रीय योजनाओं में नौ दिन के भीतर 16 फीसदी यानी 44 करोड़ से अधिक रकम खर्च करनी है।
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उपयोगिता प्रमाण पत्र के बाद ही विभागों को बजट जारी किया जाता है। विभागों को बजट लैप्स होने और कटौती से बचने की हिदायत दी है। वित्तीय वर्ष के अंत में खर्च की विभागवार समीक्षा की जाएगी। खर्च में कोताही बरतने वाले विभागों पर कार्यवाही होगी। -सी रविशंकर, डीएम, पिथौरागढ़
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