पिथौरागढ़। सीमांत जिले में 23 करोड़ रुपये की लागत से बनी मदकोट-बोना सड़क महज एक साल में राैखड़ में बदल गई। सड़क पर डामर की तहें ऐसी उखड़ीं कि विकास के पहिये पर लगा भ्रष्टाचार का जंग उभरकर सामने आ गया। लोगों की शिकायत पर अब जिलाधिकारी खुद इस मामले की जांच करेंगे।
ब्रिज रोपवे टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) ने मदकोट-बोना रोड पर एक साल पहले 23 करोड़ रुपये की लागत से काम कराया था। जिला मुख्यालय से लगभग 115 किलोमीटर दूर बनी इस सड़क का अब बुरा हाल हो चुका है। जगह-जगह डामर गायब है और लोगों का गुस्सा सड़क पर उतर है। टूटी सुरक्षा दीवारें और कॉजवे से झांकता सरिया इस बात की गवाही दे रहे हैं कि निर्माण में लापरवाही हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का जमकर प्रयोग हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जांच नहीं हुई तो जनआंदोलन खड़ा करेंगे। संवाद
सरकारी धन की बर्बादी पर उठाए सवाल
बोना क्षेत्र के ग्रामीणों ने शनिवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि सड़क तो बनी जरूर लेकिन टिकाऊ नहीं। यह सरकारी धन की खुली बर्बादी है। पूजा दानू, अतुल सिंह परिहार, दिनेश सिंह फर्स्वाण सहित कई ग्रामीणों ने डीएम आशीष भटगांई को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। संवाद
ग्रामीणों का गुस्सा
हमने सड़क मांगी थी दलदल नहीं। करोड़ों खर्च हुए लेकिन हमें फिर से गड्ढों का सफर मिला। -सुशीला बोथियाल, अध्यक्ष, सीमांत बरपटिया जनजाति उत्थान समिति
मदकोट-बोना रोड पर एक साल में ही डामर उखड़ गया है। यह सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। घटिया सामग्री का प्रयोग कर बनी यह सड़क लंबे समय तक साथ नहीं दे पाएगी। -जगत मर्तोलिया, पूर्व जिला पंचायत सदस्य
कोट
ग्रामीणों ने मदकोट-बोना रोड की हालत खराब होने की शिकायत की है। एक साल पहले बनी सड़क की ऐसी हालत चिंताजनक है। स्वयं सड़क का निरीक्षण करेंगे।
-आशीष भटगांई, डीएम, पिथौरागढ़