नाचनी (पिथौरागढ़)। वर्षों से दरक रही रातीगाड़ और हरड़िया की पहाड़ी बरसात में लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर देती है। इस कारण थल-मुनस्यारी सड़क पर तीन महीने यातायात संचालन बाधित रहता है। हर साल बरसात में भूस्खलन को रोकने के लिए इसकी मरम्मत के दावे किए जाते हैं, लेकिन बरसात गुजरने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होती है।
रातीगाड़ की पहाड़ी पर कई वर्षों से जबरदस्त भूस्खलन हो रहा है। पहाड़ी दरक रही है और रामगंगा भूकटाव कर रही है। बरसात में होने वाले भूस्खलन के कारण हर साल जुलाई से सितंबर तक आवाजाही बाधित रहती है। पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन रोकने के लिए लोनिवि के विश्व बैंक डिविजन ने वर्ष 2014 में 9 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की। भूस्खलन क्षेत्र बढ़ने से डीपीआर निरस्त हो गई। वर्ष 2016 में 15 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाई गई, लेकिन मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ।
विश्व बैंक डिविजन के सहायक अभियंता नीरज तिवारी का कहना है कि मरम्मत के लिए धन स्वीकृत है। 300 मीटर लंबा एलिवेटेट ब्रिज (ऊंचाई पर बनने वाला पुल) बनाने की योजना तैयार की जा रही है। भूस्खलन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। इस कारण आरसीसी पुल बनाना उचित नहीं है। नदी के प्रवाह से हो रहे भूस्खलन को रोकना संभव नहीं है। रातीगाड़ में रामगंगा के कटाव के कारण रसियाबगड़ की जमीन लगातार कटती जा रही है। पहाड़ी पर भूस्खलन का दायरा बढ़ा तो बोरागांव भी खतरे में आ सकता है।
रातीगाड़ के साथ ही हरड़िया में भी भूकटाव से खतरा उत्पन्न हो गया है। वैलीब्रिज के सहारे नाले को पार किया जा रहा है। नाचनी की ओर 100 मीटर हिस्से पर भूस्खलन हो रहा है। सितंबर में चट्टान को काटकर सड़क बनाई गई थी, लेकिन बरसात के बाद स्थिति जस की तस है। हरड़िया के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट है। इससे 70 मीटर लंबा स्टील गार्डर पुल बनना है।
रातीगाड़ में नदी का रुख बदलने की योजना बनाई जा रही है। 15 दिन के भीतर खनन एवं भू-वैज्ञानिक सिंचाई विभाग की टीम मौके का मुआयना करेगी। -केएन गोस्वामी, एसडीएम मुनस्यारी