पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाला बगड़ीहाट का प्राचीन भवन
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पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में बगड़ीहाट का 210 साल पुराना मकान भी आ रहा है। इस मकान को 1807 में पाल राजवंश के तत्कालीन राजा महेंद्र पाल ने बनाया था। इसमें राजा की कोर्ट लगती थी और घाटी वाले इलाकों से एकत्र किए जाने वाले सामान का भंडार भी इसी में था। जौलजीबी मेले के लिए इसी भंडार से राशन एवं अन्य सामग्री दी जाती थी। अस्कोट रियासत का अस्तित्व समाप्त होने के बाद इस भवन की उपयोगिता समाप्त होने लगी।
बताया गया कि अस्कोट के राजा ने इस भवन में एक चौकीदार और एक भंडारगृह का प्रभारी भी नियुक्त किया था। भवन में अंतिम चौकीदार के रूप में नर सिंह और अंतिम भंडार प्रभारी के तौर पर चेतराम जोशी ने काम किया। क्षेत्र के बुजुर्ग कृष्ण बहादुर पाल का कहना है कि अब मकान में कोई नहीं रहता। बीच-बीच में देखरेख के लिए अस्कोट पालवंश के वर्तमान वारिस भानुराज पाल अपने लोगों को भेजते हैं।
अस्कोट के राजा ने इस भवन को प्राचीन वास्तुशिल्प के आधार पर तैयार किया था। उसमें पत्थरों की मोटी दीवार लगाई गई और मजबूत इमारती लकड़ी का प्रयोग किया गया। लोनिवि के अधिशासी अभियंता एबी कांडपाल ने बताया कि हाल ही में पंचेश्वर बांध की जो डीपीआर सामने आई है, उसमें इस भवन को भी डूब क्षेत्र में दिखाया गया है। यदि बांध बनता है कि तो 210 साल पुरानी यह ऐतिहासिक विरासत भी जलमग्न हो जाएगी।
जौलजीबी की पूरी बाजार डूब क्षेत्र में
लोनिवि के अधिशासी अभियंता कांडपाल ने बताया कि जौलजीबी की पूरी बाजार डूब क्षेत्र में है। जौलजीबी में हर साल नवंबर में व्यापारिक मेला लगता है और इस स्थान पर नेपाल को जाने के लिए झूलापुल बना हुआ है। जौलजीबी में करीब 150 दुकान हैं। यहां पर राजकीय इंटर कॉलेज, बैंक, पेट्रोल पंप, पुलिस थाना, एसएसबी की चौकी भी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का यह प्रमुख कस्बा है।