फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज 58 साल का हो जाएगा अपना पिथौरागढ़

विज्ञापन
विज्ञापन
पिथौरागढ़। अपना जिला पिथौरागढ़ शनिवार 24 फरवरी को 58 साल का हो जाएगा, लेकिन जिला अब भी विकास की गति नहीं पकड़ पाया है। जिले में सड़क, पानी, बिजली, चिकित्सा जैसी सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है। जिला मुख्यालय बनने से सोरघाटी (पिथौरागढ़) का दायरा अवश्य बढ़ा, लेकिन असुविधा, अव्यवस्थाओं में भी बढ़ोतरी हो गई।
विज्ञापन


चीन के साथ संबंधों में कटुता आने के कारण सरकार ने 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिले का गठन किया। जिले के गठन के साथ ही यहां पर सेना का ब्रिगेड हेडक्वाटर स्थापित हो गया। केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों की संख्या बढ़ने लगी। सीमांत के लोगों को जिला मुख्यालय के कामों के लिए अल्मोड़ा जाने से मुक्ति मिल गई, लेकिन जिला गठन के बाद जिस तरह की उम्मीद थी उसे आधी सदी बीतने के बाद भी पंख नहीं लगे। राज्य गठन के बाद भी जिले को उसका वाजिब हक नहीं मिल पाया।

अब भी जिले के 30 प्रतिशत गांवों में सड़क नहीं है। दो दर्जन से अधिक राजस्व गांवों के लोग बिजली से वंचित हैं। स्वास्थ्य के लिहाज से यह जिला अव्यवस्था का शिकार है। जिला चिकित्सालय के साथ ही हर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। आईसीयू और ट्रामा सेंटर तक की सुविधा नहीं है। जिला मुख्यालय में 200 बिस्तरों के बेस अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। वर्ष 2016 में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हो चुका है, लेकिन बात शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ी।
विज्ञापन


बेस अस्पताल के साथ ही मेडिकल कॉलेज की स्थापना होने के बाद सीमांत जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर आ सकती है। शिक्षा की भी जितनी बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई है। जिला मुख्यालय में इंजीनियरिंग कॉलेज, बांस, गणाईगंगोली, कनालीछीना, मूनाकोट, बंगापानी, बांसबगड़ में पालीटेक्निक कॉलेजों की स्थापना हाल के वर्षों में हुई है। व्यावसायिक शिक्षा के और अवसरों की जरूरत जिले के नौनिहालों को है।

बात धार्मिक पर्यटन की करें तो ऊं पर्वत, छोटा कैलाश, पाताल भुवनेश्वर, हाट कालिका, चामुंडा, त्रिपुरासुंदरी, कोकिला (कोटगाड़ी) आदि शक्तिस्थलों के साथ ही कई पौराणिक देवस्थल होने के बाद भी धार्मिक पर्यटन को पंख नहीं लगे हैं। मुनस्यारी, चौरोड़ी आदि पर्यटन स्थलों में 58 सालों में सुविधा नहीं बढ़ पाई। जिले के सुदूर क्षेत्र तो छोड़िए, जिला मुख्यालय में तक पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। राजकाज ऐसा है कि वर्ष 2010 में नगरपालिका द्वारा बनाई गई पार्किंग पर पालिका का कब्जा नहीं है। इस कारण आम लोगों को पार्किंग का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

उड़ान और रेल सेवा के सिर्फ सब्जबाग दिखाए
वर्ष 1993 में बनी नैनीसैनी हवाई पट्टी से सिर्फ उड़ानें शुरू होने की घोषणाएं होती रही हैं। हाल के वर्षों में हवाई पट्टी का विस्तारीकरण हुआ है। प्रदेश सरकार ने उड़ान योजना के तहत हवाई पट्टी से व्यावसायिक उड़ानों को हरी झंडी मिलने की बात सार्वजनिक की है। मार्च से उड़ान शुरू कराने का दावा किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने टनकपुर से जौलजीबी तक रेलवे लाइन बनाने के सब्जबाग समय-समय पर दिखाए हैं, लेकिन अब तक रेल लाइन का सर्वे शुरू नहीं हुआ है।

पहले डीएम थे जीवन चंद्र
24 फरवरी को जिले गठन के बाद 28 फरवरी 1960 को पहले जिलाधिकारी के रूप में जीवन चंद्र पांडे ने पदभार संभाला। वह दो वर्ष तक यहां रहे। पांडे के बाद यूपी काल में 29 जिलाधिकारियों ने यह कुर्सी संभाली। राज्य गठन के बाद 18वें डीएम के रूप में सी रविशंकर यहां कार्यरत हैं।

चंपावत के रूप में झेला है विभाजन
15 सितंबर 1997 को पिथौरागढ़ ने चंपावत जिले के रूप में विभाजन झेला है। डीडीहाट जिले के गठन के लिए सियासी दांवपेंच चल रहे हैं। वर्ष 2010 में भाजपा शासनकाल में डीडीहाट जिले की घोषणा भी हो चुकी है। भविष्य में डीडीहाट जिला बना तो पिथौरागढ़ में गंगोलीहाट और पिथौरागढ़ तहसील ही रह जाएगी।

सही नियोजन की दिशा नहीं मिली : ऐरी
राज्य आंदोलन की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में रहे उत्तराखंड क्रांति दल के शीर्ष नेता पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी कहते हैं कि पिथौरागढ़ जिले को सही नियोजन की दिशा नहीं मिली। उत्तर प्रदेश के समय में दंड के रूप में यहां अधिकारी भेजे जाते थे, उत्तराखंड गठन के बाद भी यही हो रहा है। उनका मानना है कि जिले के विकास के लिए अधिकारियों, नेताओं को सोच में बदलाव लाना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें