पिथौरागढ़। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में वीरता का परिचय देने वाले 16 कुमाऊं रेजीमेंट के सूबेदार मेजर स्व. हीरा सिंह (रक्षा मेडल, समर सेवा मेडल) की धर्मपत्नी 88 वर्षीय बुजुर्ग पार्वती देवी को कई सालों से आधे से भी कम पेंशन का भुगतान बैंक द्वारा किया जा रहा था। कम पेंशन मिलने के संबंध में बैंक में आपत्ति लगाने के बाद वास्तविक पेंशन का भुगतान हुआ है। उनको 26000 रुपये से कम पेंशन मिलती थी, जो बढ़कर 54707 रुपये हो गई है। उन्हें अवशेष पेंशन का 17 लाख रुपये भुगतान हुआ है।
तहसील के कुम्डार निवासी हीरा सिंह ने वर्ष 1965 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सेना मेडल, समर सेवा मेडल से सम्मानित किया। हीरा सिंह का वर्ष 1969 में सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। उनकी धर्मपत्नी पार्वती देवी को तमाम वेतन संशोधनों, वेतन आयोगों की सिफारिश के अनुरूप पेंशन नहीं मिली। इसकी जानकारी मिलने पर परिवारजनों ने कुछ महीने पहले पेंशन प्रकरणों में कार्यवाही कराने वाले सेवानिवृत्त उप कोषाधिकारी डीएस भंडारी से संपर्क किया। भंडारी ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की स्थानीय शाखा से पत्राचार किया। बताया कि देश के लिए वीरता का परिचय देने वाले सूबेदार मेजर की पत्नी को कम पेंशन दी जा रही है। कहा कि वर्ष 2006 से 2014 के संशोधनों, सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप पेंशन नहीं दी जा रही है। शाखा के अधिकारियों ने बैंक के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद वीरांगना की पेंशन में बढ़ोतरी हुई। पेंशन की अवशेष राशि का भुगतान इसी महीने हुआ है। वीरांगना पार्वती देवी ने वास्तविक पेंशन दिलाने के लिए डीएस भंडारी का आभार जताया है।
वीरांगना को पेंशन कम दी जा रही थी
बैंक में आपत्ति के बाद पेंशन में हुई दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी