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नेपाल के चुनावों को लेकर लोगों में उत्सुकता

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बैतड़ी (पिथौरागढ़)। तीसरी बार संसदीय और पहली बार होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर नेपाल के लोगों में काफी उत्सुकता है। नेपाल में राजतंत्र की समाप्ति और प्रजातंत्र लागू होने के बाद 2007 में पहली बार हुए चुनावों में माओवादियों को भारी बहुमत मिला था और माओवादियों की सरकार बनी थी। तब से अब तक नेपाल में प्रजातांत्रिक व्यवस्था में 9 प्रधानमंत्री बन चुके हैं। कुछ समय पहले नेपाल में नया संविधान बनकर तैयार हुआ है और अब नेपाल में पहली बार 7 राज्य बन गए हैं। इन सात राज्यों की विधानसभा के लिए भी पहली बार मतदान होगा।
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26 नवंबर को नेपाल में संविधान बनने के बाद होने वाले पहले चरण के चुनाव पर भारत की भी नजरें हैं। नेपाल के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड बने थे। उनके बाद झलनाथ खनाल, बाबूराम भट्टराई, माधव कुमार नेपाल, खिलराज रेग्मी, सुशील कोईराला, केपी ओली, पुष्प कमल दहल प्रचंड और शेर बहादुर देउबा को मिलाकर 10 वर्षों में 9 प्रधानमंत्री बन चुके हैं। नेपाल के इन चुनावों को लेकर भारत की रुचि इसलिए भी है, क्योंकि इस समय नेपाल और भारत के बीच महाकाली नदी पर बनने वाले 5600 मेगावाट के पंचेश्वर बांध परियोजना, 1200 मेगावाट की अपर कर्णाली परियोजना और महेंद्रनगर से झापा तक पूर्व से पश्चिम तक बनने वाले हुलाकी मार्ग सहित कई संयुक्त परियोजनाओं पर काम चल रहा हैं। नेपाल में बनने वाली नई सरकार पर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

नेपाल में प्रजातांत्रिक व्यवस्था के बाद अब तक नेपाल की 2 बड़ी पार्टियों में एमाले और माओवादियों के 3-3 बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं, जबकि नेपाली कांग्रेस के 2 बार ही प्रधानमंत्री बने है। नेपाली कांग्रेस के प्रधानमंत्री सुशील कोईराला के समय भारत और नेपाल के बीच कई समझौते हुए थे। बाद में एमाले ने केपी ओली के प्रधानमंत्री बनने पर भारत के साथ किए गए कई समझौते निरस्त कर दिए। इससे दोनों देशों के बीच तकरार बड़ी थी। इस लिहाज से 26 नवंबर और 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव में भारत की नजरें भी रहेंगी।
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नेपाल में 26 नवंबर को पहले चरण में एवं 7 दिसंबर को द्वितीय चरण में प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा के चुनाव होने हैं। प्रतिनिधि सभा में 165 सांसद प्रत्यक्ष रूप से और 110 समानुपातिक रूप से चुने जाएंगे। इस प्रकार नेपाल की संसद में 275 सांसद चुने जाएंगे। 2013 के चुनाव में इनकी संख्या 601 थी। बाद में नेपाल में संविधान बनने पर परिसीमन कर इनकी कुल संख्या 275 कर दी गई।

पहली बार हो रहे प्रदेश सभा के चुनाव में नेपाल के 7 राज्यों में 330 प्रदेश सभा सदस्य (एमएलए) चुने जाएंगे। इन्हीं के आधार पर सभी राज्यों में पहली बार मुख्यमंत्री चुने जाएंगे। नेपाल में 26 नवंबर को प्रतिनिधिसभा और प्रदेशसभा के 34 जिलों में पहले चरण में मतदान होना है और 7 दिसंबर को द्वितीय चरण में 43 जिलों में चुनाव होंगे।

नेपाल में दो चरणों में होने वाले चुनाव में इस बार अधिकांश सीटों पर नेपाली कांग्रेस और राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी संयुक्त रूप से लोकतांत्रिक गठबंधन नाम से चुनाव लड़ रही हैं। इसी तरह नेकपा, एमाले और नेकपा माओवादी संयुक्त रूप से वाम गठबंधन के नाम से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार के चुनाव में दोनों गठबंधनों के बीच कांटे का मुकाबला होने की उम्मीद है। इस चुनाव में सात राज्यों को राजधानी और मुख्यमंत्री भी मिल जाएंगे।
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