धारचूला (पिथौरागढ़)।
दारमा घाटी के बोन गांव के एक बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से धारचूला अस्पताल तो पहुंचा दिया गया लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई। परिजनों ने बीमार व्यक्ति के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। बताया गया है कि इस बीमार को हेलीकॉप्टर से लाने पर कुछ लोगों ने यह आपत्ति भी की थी कि हेलीकॉप्टर सेवा सिर्फ आपदा प्रभावितों के लिए है। दूसरों को लाकर सेवा का दुरुपयोग न किया जाए।
बताया गया है कि बोन गांव निवासी चैत राम (50) पुत्र जसुवा राम अपने घर पर गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। ग्राम प्रधान आशा देवी के आग्रह पर चैत राम को हेलीकॉप्टर से छह सितंबर को धारचूला अस्पताल लाया गया। अस्पताल में सिर्फ एक दिन रखने के बाद चैत राम को घर जाने की सलाह दी गई। चैत राम बिना हेलीकॉप्टर के अपने गांव नहीं जा सकता था। वापसी में हेलीकॉप्टर न मिलने के कारण वह गोठी गांव निवासी अपने रिश्तेदार के घर चले गए। रविवार रात चैत राम की मौत हो गई। इस मामले में सोमवार को मृतक की बेटी विमला देवी, छोरी देवी आदि लोगों ने एसडीएम आरके पांडे को ज्ञापन दिया और चैत राम के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इन लोगों ने कहा कि दारमा घाटी के एक क्षेत्र पंचायत सदस्य ने चैत राम को हेलीकॉप्टर से लाने पर आपत्ति की थी। उन्होंने प्रशासन से हेलीकॉप्टर का किराया चैत राम से वसूलने की मांग की थी। एसडीएम ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीमार चैत राम से किराया वसूलने जैसी कोई बात नहीं की गई।