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डूब क्षेत्र के झूलाघाट कस्बे में अब मायूसी का आलम

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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पंचेश्वर बांध के हो-हल्ले के बीच झूलाघाट कस्बे की रौनक गायब होने लगी है। पड़ोसी देश नेपाल से यहां आकर सामान लेने वाले ग्राहकों की संख्या लगातार कम हो रही है। नेपाल में आठूं पर्व अगस्त में मनाया जाता है। इस महीने ग्राहकों की संख्या बढ़ने के बजाय कम होने लगी है। व्यापारियों की भी उदासी लगातार बढ़ती जा रही है।
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पंचेश्वर बांध के निर्माण की प्रक्रिया लगातार तेज हो रही है। लोगों को इस बात की आशंका है कि पता नहीं कितने दिनों तक अपनी जमीन पर रह पाएंगे और सरकार कब उनको बेदखली का आदेश देगी। पंचेश्वर बांध की हलचलें पड़ोसी देश नेपाल के गांवों में भी पहुंच गई है, जिस कारण नेपाल में 30 और 31 अगस्त को होने वाले आठूं पर्व को लेकर कोई उत्साह नहीं है।

नेपाल से ग्राहकों का आना कम हुआ
व्यापारी विजय भट्ट का कहना है कि बांध बने या ना बने, लेकिन उसका असर दिखने लगा है। झूलाघाट के बाजार में नेपाल के ग्राहक आते हैं। बांध बनने की सूचना मात्र से ही यहां पर ग्राहकों का आना कम हो गया है। नेपाल में आठूं पर्व से पहले यहां के बाजार में रौनक रहती थी, लेकिन इस वर्ष यह रौनक गायब है।
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बांध बनने से पहले बाजार समाप्त न हो जाए
रेडीमेड व्यापारी टीकाराम भट्ट का कहना है कि बांध बनाने की तैयारी से पूरे क्षेत्र का विकास रुक गया है। बांध की हवा में बाजार की रौनक ही गायब हो गई है। बांध के बनने में तो अभी समय लगेगा, लेकिन झूलाघाट के कुछ लोग गांवों में जाकर व्यर्थ में बांध पर रोटियां सेंकने का काम कर रहे हैं। उनकी मंशा बांध बनने से पहले ही बाजार को समाप्त कर देना है।

अभी सरकार की मंशा का इंतजार किया जाए
व्यापारी डिगरदेव गड़कोटी का कहना है कि सरकार ने अब तक यह स्पष्ट ही नहीं किया है कि बांध बनेगा या नहीं, लेकिन बाजार अभी से चौपट हो गया है। वह कहते हैं कि 60 साल से बांध की चर्चा सुन रहे हैं, लेकिन अब तक बांध तो नहीं बना, लेकिन लोगों में भय का माहौल जरूर हो गया है। वह कहते हैं कि अभी सरकार की मंशा का इंतजार करने की जरूरत है।

छोटे कस्बों के लोग परेशानी में
थोक व्यापारी गोलू बिष्ट का कहना है कि बांध की चर्चाओं के कारण व्यापार में नुकसान उठाना पड़ रहा है। वह कहते हैं कि व्यापारियों ने पहले नोटबंदी का फिर जीएसटी का और अब बांध का संकट झेलना पड़ रहा है। आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर इलाके का विकास रोक रखा है। विकास सिर्फ बड़े शहरों में हो रहा है। छोटे कस्बों के लोग वैसे ही परेशानी में हैं।
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