पिथौरागढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष के कारावास और सत्तर हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
धारचूला तहसील क्षेत्र के एक गांव निवासी जगदीश सिंह ने वर्ष 2019 में एक नाबालिग को अपने घर बुलाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। उसने किसी से शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। उसने नाबालिग को डरा धमकाकर दो-तीन बार उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। गर्भवती होने पर उसने पीड़िता को दवा खिला दी। मार्च 2020 में नाबालिग के साथ फिर से दुष्कर्म करने पर नाबालिग ने अपनी मां को बताया। जब पीड़िता के माता-पिता आरोपी जगदीश के घर गए तो उन्हें भी डराया, धमकाया। इसलिए पीड़िता के पिता ने धारचूला पुलिस थाना में तहरीर दी। इस आधार पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366 क, 376(3) के तहत केस दर्ज किया गया।
आरोप पत्र दायर होने पर यह मामला जिला सत्र न्यायालय में चला। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोष सिद्ध कर जगदीश को आईपीसी की धारा 363 के तहत सात वर्ष के कारावास और दस हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक साल के कारावास की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। धारा 366 क के तहत दस वर्ष का कारावास और दस हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो वर्ष के कारावास की सजा भुगतनी होगी।
धारा 376(3) के तहत बीस वर्ष के कारावास और पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियुक्त की सभी सजाएं एकसाथ चलेंगी। यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा करेगा तो उसमें से साठ हजार रुपया पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा। मामले की पैरवी डीजीसी फौजदारी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।