पिथौरागढ़। अपनी उम्र पार कर चुकीं पुरानी खटारा 20 बसें सड़कों पर दौड़ाने को पिथौरागढ़ डिपो विवश है। निगम यात्रियों की सुरक्षा को अनदेखा कर डिपो को नई बस उपलब्ध कराने से हाथ पीछे खींच रहा है। हैरानी की बात है कि जो नई बसें डिपो को मिलीं उन्हें भी लोहाघाट भेज दिया गया है जिस पर विभिन्न संगठनों ने सवाल खड़े किए हैं।
जिले से विभिन्न रूटों के लिए लंबे समय से बस सेवा बंद है। इसका प्रमुख कारण डिपो के पास पर्याप्त बसें न होना और पुरानी खटारा बसों की उपलब्धता है। डिपो को पुरानी खटारा बसों से छुटकारा पाने और विभिन्न रूटों पर इनके संचालन के लिए 60 नई बसों की जरूरत है। डिपो को इस वर्ष बमुश्किल सिर्फ छह नई बसें मिलीं।
इनमें से भी दो बसों को लोहाघाट भेज दिया गया है। ऐसे में सीमांत जिले के लोगों के लिए पुरानी बसों में खतरे के बीच सफर करना मजबूरी बन गया है। नई बसों को वापस भेजने से जिले के लोगों के साथ ही विभिन्न संगठनों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकार और परिवहन निगम यही चाहता है कि हम पुरानी खटारा बसों में जान जोखिम में डालकर सफर करते रहें।
बोले लोग
रोडवेज सेवा सस्ती, सुलभ और सुदृढ़ होनी चाहिए। यहां से बसों को दूसरी जगह भेजा जाना सरासर गलत है। अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन कर जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाई जाएगी। - महेंद्र सिंह लुंठी, पूर्व दायित्वधारी, कांग्रेस
सभी डिपो को बस मिलें, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए। राजनीतिक दबाव की बजाय जरूरत के हिसाब से हर क्षेत्र को तवज्जो मिलनी चाहिए। पिथौरागढ़ से अधिकांश बसें तो लोहाघाट, चंपावत और टनकपुर होते हुए ही जाती हैं। - गोविंद कफलिया, जिला संयोजक, भाकपा-माले
पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने की बजाय इन्हें अन्य जगह भेजना गलत कदम है। पहाड़ों में अधिकांश लोग अब भी रोडवेज के सहारे सफर करते हैं। सरकार को पिथौरागढ़ डिपो के लिए पर्याप्त नई बसों की व्यवस्था करनी चाहिए। - राम सिंह बिष्ट, नगर महामंत्री, यूकेडी
पिथौरागढ़ के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ जनप्रतिनिधियों को भी आवाज बुलंद करने की आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना जनप्रतिनिधियों का नैतिक दायित्व है। इससे सभी हाथ पीछे खींच रहे हैं। - भगवान सिंह रावत, संयोजक, जनमंच