पिथौरागढ़। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के अंतर्गत छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के साथ ही आर्ट क्राफ्ट प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें हुनरमंद बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों को भविष्य में स्वावलंबी बनने में भी मदद मिलेगी।
सीमांत जिले के 24 विद्यालयों के कक्षा 9 और 11 में पढ़ने वाले 720 छात्र-छात्राओं को 30 मार्च तक 45 घंटे का आर्ट क्राफ्ट का प्रशिक्षण दिया गया। जिला परियोजना अधिकारी डॉ. एके गुंसाई और जिला संदर्भ व्यक्ति वीके टम्टा ने बताया कि जिले के आठों विकास खंडों के तीन-तीन विद्यालयों में स्थानीय स्तर पर होने वाली सामग्री और छात्र-छात्राओं की रुचि के अनुसार प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य था कि बच्चे अपनी स्थानीय परंपरागत क्राफ्ट को जानने, सीखने के साथ ही भविष्य में रोजगार से भी जुड़ सकें। विद्यालयों में 45 दिन तक रोज एक घंटे का रिंगाल से डोके, टोकरी, पैन स्टेंड, छपरी, फूलदान के साथ ही ऊन से दन बनाना, सिलाई-कढ़ाई आदि का प्रशिक्षण दिया गया। स्थानीय स्तर पर इन वस्तुओं को बनाने वाले प्रशिक्षकों को 10 हजार रुपये का मानदेय उपलब्ध कराया गया। राइंका पत्थरखानी के प्रधानाचार्य कौस्तुभ चंद्र जोशी ने बताया कि छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण में दिलचस्पी दिखाई। इस प्रशिक्षण से बच्चे भविष्य में अपना कुटीर उद्योग खोलकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकते हैं।