पिथौरागढ़। नया सत्र शुरू होने के साथ ही सीमांत जिले के 216 दुर्गम सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई चौपट हो गई है। इस स्कूलों में तैनात रहे अतिथि शिक्षकों के जाने से यह हालात पैदा हुए हैं। स्थिति यह है कि इस सत्र में छात्रों को पढ़ाने वाले नहीं मिल रहे। शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बावजूद इसके कोई देखने वाला नहीं है।
पिथौरागढ़ जिले के विण, मूूनाकोट, कनालीछीना, डीडीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला, मुनस्यारी और गंगोलीहाट विकास खंडों के दुर्गम क्षेत्रों के 216 सरकारी विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इन स्कूलों में 316 प्रवक्ता और 175 एलटी अतिथि शिक्षकों की तैनाती की गई थी। इससे पहले यह स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे थे। दुर्गम क्षेत्रों के इन स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की नियुुक्ति से काफी हद तक पढ़ाई ढर्रे पर आ गई थी, लेकिन अतिथि शिक्षकों का सेवा विस्तार समाप्त हो जाने सेे फिर वहीं हालात पैदा हो गए हैं।
इधर, अतिथि शिक्षकों के जाने के बाद इन 216 स्कूलों में शिक्षकों के 491 पद रिक्त हो गए हैं। नतीजतन नए सत्र में छात्रों को पढ़ाने वाले नहीं मिल रहे। इससे कक्षाओं का संचालन नहीं हो पा रहा।
अतिथि शिक्षकों के जाने के बाद नए सत्र में पढ़ाई प्रभावित हुई है। इन स्कूलों में मौजूदा स्टाफ से संबंधित विषयों की कक्षाएं चलाने को कहा गया है। निदेशालय को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। विभाग स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पर विचार कर रहा है। जरूरत पड़ने पर शिक्षकों के समायोजन किए जाएंगे। -डॉ.वीपी सिमल्टी, मुख्य शिक्षाधिकारी, पिथौरागढ़