पिथौरागढ़। धारचूला में ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की तिथि नजदीक आते ही एक क्षेत्र पंचायत सदस्य की सदस्यता खतरे में पड़ गई है। रांथी के क्षेत्र पंचायत सदस्य मान सिंह पर आरोप है कि उन्होंने वन पंचायत सरपंच के पद से इस्तीफा दिए बगैर क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था और चुनाव जीत गए। चुनाव जीतने के बाद भी लंबे समय तक उन्होंने सरपंच के पद से इस्तीफा नहीं दिया। उनके मामले की जिलाधिकारी सी रविशंकर ने सात अक्तूबर को जांच कर अपनी रिपोर्ट पंचायती राज निदेशक को सौंपी थी। पंचायती राज निदेशक एचसी सेमवाल की ओर से सोमवार को क्षेत्र पंचायत सदस्य मान सिंह के नाम यह नोटिस जारी किया है कि उन्होंने दो पदों का अनुचित तरीके से लाभ उठाया है। यह पंचायती राज अधिनियम की धारा 53 (1) ग में निहित प्रावधान के अनुसार गलत है। साथ ही आरोप है कि मान सिंह ने तथ्यों को छुपाने का काम किया।
बताया गया है कि कुछ महीने पहले जब इस मामले को लेकर कुछ जनप्रनिधियों ने आवाज उठाई तो 25 मार्च 2017 को मान सिंह ने सरपंच पद से इस्तीफा तो दे दिया लेकिन सरपंच का बस्ता विधिवत प्रशासन के पास जमा नहीं कराया। उन पर वित्तीय अनियमितता का भी आरोप लगाया गया है। निदेशक की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर मान सिंह को क्षेत्र पंचायत सदस्य के पद से हटा दिया जाए। इस नोटिस में मान सिंह से आज ही (9 अक्तूबर) को अपराह्न चार बजे तक ईमेल या फैक्स से जवाब मांगा गया था लेकिन जब उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला तो धारचूला के एसडीएम आरके पांडे उनके घर पर जाकर यह नोटिस चस्पा कर आए हैं।
बताया गया है कि मान सिंह निर्दलीय तौर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े थे लेकिन ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव आ जाने के बाद वह कांग्रेस के समर्थन में खड़े हो गए थे। ब्लाक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर कांग्रेस के हैं। अब 38 सदस्यों वाली क्षेत्र समिति में 12 अक्तूबर को होने वाले अविश्वास प्रस्ताव के समय कांग्रेस का पलड़ा कमजोर हो जाएगा। क्योंकि शासन और पंचायती राज निदेशालय ने ऐन मौके पर जिस तरह इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाया है, उसे देखते हुए मान सिंह की क्षेत्र पंचायत सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाएगी।