पिथौरागढ़। पर्वतीय जिलों में होम स्टे से पर्यटकों को सुविधा मुहैया कराने और युवाओं को घर पर ही रोजगार से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना बैंकों में लटक गई है। बैंकों से योजना के ऋण के आवेदन स्वीकृत नहीं होने से आवेदक परेशान हैं। साथ ही नए होम स्टे के लिए आवेदकों की फाइल भी पर्यटन विभाग से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने और बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार ने इसी वर्ष से दीनदयाल गृह आवास योजना (होम स्टे) शुरू की है। सीमांत जिले में वर्ष 2018-19 के लिए 200 होम स्टे बनाने का लक्ष्य रखा गया है। होम स्टे का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया गया। प्रशासन की ओर से कई स्थानों पर ग्रामीणों से वार्ता कर उन्हें गांवों में होम स्टे के लिए तैयार किया गया।
पर्यटन विभाग की ओर से अगस्त में 33 आवेदकों की फाइलों को विभिन्न बैंकों को भेजा गया है, लेकिन अब तक इन्हें वित्त पोषित करने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। पर्यटन विभाग में होम स्टे के लिए अभी एक दर्जन आवेदन और आए हैं।
विभाग का कहना है कि जब तक पूर्व में भेजे गए आवेदन वित्त पोषित नहीं हो जाते, तब तक नए आवेदन बैंकों को नहीं भेजे जाएंगे। लीड बैंक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शासन की ओर से अभी होम स्टे योजना के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। निर्देश आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बैंकों में इन स्थानों की लटकी हैं फाइल
खुम्ती, धारी धमौड़ा, रांथी, पातालभुवनेश्वर, लिंठ्यूड़ा, गोचर, उडियारी बैंड, लेक, देवल, किरी गांव, किमखोला, चौपता, सल्ला, पय्यापौड़ी, जजुराली, मझेड़ा, जजूट, सिर्दांग, उछैती, भौड़ी, पियाना, मदकोट, भट्यूड़ा, सरमोली, नाचनी, दांतू।