पिथौरागढ़। मातृभूमि की रक्षा के लिए तीन युद्ध लड़ने वाले वीर योद्धा सूबेदार (रिटायर्ड) लक्ष्मण सिंह बिष्ट (87) का खून सीमा की सुरक्षा की चर्चा होने पर आज भी खौल उठता है। यह जांबाज वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में घायल हो गए थे।
पिथौरागढ़ तहसील के डुंगरी के मूल निवासी लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने वर्ष 1962 के भारत-चीन, वर्ष 1965 और वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया था। देश के लिए तीन लड़ाई लड़ने वाले यह वीर योद्धा वर्ष 1971 की भारत-पाक लड़ाई का वाकया बताते हुए कहते हैं कि इस लड़ाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिए थे। बताते हैं कि 1971 की लड़ाई में उनकी टुकड़ी जम्मू के सुचेतगढ़ में गश्त पर भी, इसी दौरान दुश्मनों की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंग की चपेट में आने से वह घायल हो गए। उनके पैर में कई छर्रे आ लगे थे। कहते हैं कि देश सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। कहते हैं कि देश की नई पीढ़ी को सैन्य सेवा में जाना चाहिए। 21 जून 1950 को थल सेना की 5 कुमाऊं रेजीमेंट में सिपाही पद पर भर्ती हुए जांबाज बिष्ट एक जुलाई 1978 को सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए। वह शहर के कृष्णापुरी में अपने बेटों के साथ रहते हैं।
पोते निभा रहे सैन्य परंपरा
पिथौरागढ़। जांबाज लक्ष्मण सिंह बिष्ट के बड़े पोते मोहित बिष्ट सेना में लेफ्टिनेंट हैं। छोटे पोते मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं। इनके बड़े पुत्र कृष्ण सिंह बिष्ट एडवोकेट हैं। छोटे पुत्र देवेंद्र सिंह बिष्ट शिक्षक हैं। पोती मैत्री और दीपाली पिथौरागढ़ के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ती हैं।