झूलाघाट (पिथौरागढ़)। क्षेत्र का एकमात्र पशु अस्पताल 32 वर्षों से किराए के मकान में चल रहा है। दो कमरों में संचालित अस्पताल की छत से हमेशा मिट्टी गिरती रहती है। नेपाल सहित दो दर्जन से अधिक गांवों के पशुओं का इलाज करने वाले अस्पताल में सीलन के कारण दवाएं सुरक्षित रखने के लिए भी स्थान नहीं है।
नेपाल सीमा पर बसे झूलाघाट कस्बे का एकमात्र राजकीय पशु चिकित्सालय के पास अपना भवन तक नहीं है। 175 रुपये के किराए के दो कमरों में चल रहे अस्पताल का भवन जर्जर हाल है। अस्पताल में हर माह क्षेत्र के तालेश्वर, गेठिगाड़ा, झूलाघाट, जुलगांव, कानड़ी, सीमू, बल्तड़ी, तड़गांव, भटेड़ी, बिषखोली, बर्गतोली सहित नेपाल के सीमावर्ती गांवों के 600 से अधिक पशुओं का उपचार होता है। अस्पताल में बधियाकरण, टीकाकरण, कृतिम गर्भाधान की सुविधाएं भी हैं।
अस्पताल में शीतकाल और वर्षाकाल में सीलन अधिक होने से दवाइयों के खराब होने का खतरा रहता है। 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पशु अस्पताल के लिए जमीन क्रय करने के आदेश भी दिए थे। कुछ दिनों तक प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
अस्पताल की स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। कुछ दिन तक आंगनबाड़ी केंद्र में भी अस्पताल संचालित किया गया। वहां पर भी छत टपकने से वापस पुराने भवन में ही संचालित किया जा रहा है। -डॉ.सौरभ भट्ट, पशु चिकित्साधिकारी, झूलाघाट