पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से एक से पांच अक्तूबर तक लगाए गए मर्म चिकित्सा शिविर में शामिल हुए सैकड़ों मरीजों को फायदा हुआ। वर्षों से शारीरिक कष्ट झेल रहे लोगों के लिए यह शिविर वरदान साबित हुआ। अब लोग यह पूछने लगे हैं कि दुबारा शिविर कब लगेगा। कुछ लोग तो ऐसे हैं कि वह शिविर के दौरान सीखी चिकित्सा प्रणाली का लाभ अन्य लोगों तक भी पहुंचा रहे हैं। मर्म चिकित्सा को लोग चमत्कारिक चिकित्सा प्रणाली बताते हुए इसकी प्रशंसा करने से नहीं थकते। सबसे खास बात यह थी कि शिविर में आए हर मरीज को डाक्टरों की टीम ने देखा और उनको तत्काल फायदा भी पहुंचाया। शारीरिक व्याधियों के कारण जिंदगी से निराश हो चुके लोगों के लिए अमर उजाला फाउंडेशन का यह शिविर नई रोशनी लेकर आया था। कई लोग अब खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं।
घुटनों का दर्द 85 फीसदी कम हो गया
पिथौरागढ़। मूल रूप से पाताल भुवनेश्वर निवासी और इस समय पिथौरागढ़ देवसिंह मैदान के पास चाट का ठेला लगाने वाले 48 वर्षीय राजेंद्र सिंह रावल ने बताया कि उनके पांवों और घुटनों का दर्द 85 फीसदी तक कम हो गया है। अमर उजाला फाउंडेशन के पिथौरागढ़ में लगे शिविर में राजेंद्र सिंह ने भी उपचार कराया। श्री रावल ने बताया कि वह आज ही सिलौनी गांव जाकर एक व्यक्ति का मर्म चिकित्सा प्रणाली से इलाज कर आए हैं। उनको कई मर्म बिंदुओं की जानकारी इसी शिविर में हो गई थी। वह चाहते हैं कि जल्दी यह शिविर फिर लगाया जाए।
गले में कॉलर बांधने से छुटकारा मिला
पिथौरागढ़। जिला अधिवक्ता संस्था के उपाध्यक्ष अनिल रौतेला को स्पोंडिलाइलिटिस की बीमारी थी। उन्होंने लंबे समय तक गले में कॉलर भी लगाया था। एक अक्तूबर 2017 को जब अमर उजाला फाउंडेशन का मर्म चिकित्सा शिविर लगा तो उन्होंने सबसे पहले डाक्टरों को दिखा दिया था। अब वह गले में कॉलर लगाने की समस्या से छुटकारा पा चुके हैं। अनिल का कहना है कि डाक्टर तो सिर्फ तकलीफ के अनुसार मर्म बिंदु समझाते हैं। अभ्यास खुद करना पड़ता है। वह नियमित मर्म बिंदु को दबाते हैं और आज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। वह भी यही चाहते हैं कि अमर उजाला एक बार फिर से इस तरह का शिविर यहां पर लगाए ताकि तमाम लोगों को उसका लाभ मिल सके।