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लुप्त होने वाली धरोहरों का अध्ययन होगा

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पिथौरागढ़। उत्तराखंड शोध संस्थान ने पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रही ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासतों का अध्ययन करने और उनका शोधपरक अध्ययन कर उनके संरक्षण की दिशा में सरकार को सुझाव देने का फैसला लिया है। शोध संस्थान की यहां हुई बैठक में रामेश्वर, पंचेश्वर, तालेश्वर, हंसेश्वर जैसे आस्था के केंद्रों के डूब क्षेत्र में आने पर गहरी चिंता जताई। बैठक में कहा गया कि कई ऐतिहासिक महत्व के गांव भी जलमग्न हो जाएंगे।

इतिहासकार डॉ. मदन चंद्र भट्ट की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि बांध का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही विरासतों का अध्ययन किया जाएगा और यथासंभव उनको दस्तावेज के रूप में संकलित किया जाएगा। कहा गया कि इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए शासन को सुझाव दिया जाएगा और दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर उनकी मूल भावना से छेड़छाड़ न करने की मांग की जाएगी।
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बैठक में तय हुआ कि इस बार कुमाऊं के आदिकवि गुमानी के जन्मदिन पर युगयुगीन पिथौरागढ़ विषय पर प्रदर्शनी लगाई जाएगी। कवि गुमानी का जन्मदिन मार्च में मनाया जाएगा। प्रदर्शनी में पिथौरागढ़ के क्रमिक विकास और ऐतिहासिक अवशेषों पर आधारित अभिलेख रखे जाएंगे। ताकि लोगों को पिथौरागढ़ के इतिहास की तथ्यात्मक जानकारी मिल सके। उसी दौरान शोधार्थियों के शोधपत्रों पर आधारित हेमवती पत्रिका का प्रकाशन भी किया जाएगा। बैठक में निर्मल चौधरी, दिनेश ओझा, सभासद गंगोत्री दताल, जनार्दन उप्रेती, चंदन डसीला, गोविंद बिष्ट, डॉ. दीप चौधरी, मोहन चंद्र जोशी, हेमा थलाल, गोविंद शर्मा, संजीव जोशी, एआर दताल, देवाशीष सोनाल समेत तमाम लोगों ने विचार रखे।
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