पिथौरागढ़। जिले से वेतन ले रहे आठ आयुर्वेदिक चिकित्सक इस समय देहरादून में अपनी सेवाएं दे रहें हैं। ये चिकित्सक लंबे समय से आयुर्वेद विश्वविद्यालय हर्रावाला से संबद्ध हैं। यह तब है जबकि जिले के 82 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में से केवल 52 में ही चिकित्सक तैनात हैं और जिले के 38 स्वास्थ्य केंद्र इस समय चिकित्सक विहीन हैं।
जिला आयुर्वेदिक यूनानी कार्यालय के अनुसार रामेश्वर के डॉ. नर सिंह नारायण तिवारी, जजुराली के डॉ. देशराज सिंह, डीडीहाट के गर्खा के डॉ. रणजीत सिंह रावत, सिंघाली की डॉ. प्रीति मिश्रा रावत, डीडीहाट के डॉ. निर्मल कुमार सामंत, देवीसूना की डॉ. ममता सामंत, जमराड़ी (घाट) के डॉ. मणि कुमार, भिनगड़ी (गणाईगंगोली) के डॉ. विजय कुमार गंगवार को देहरादून विश्वविद्यालय से संबद्ध है। हालत यह है कि अलगड़ा, खतेड़ा, पांखू, रसैपाटा, कौलपानी, बिशूनाखान, कांडेकिरौली, खिरमांडे, रूंग, होकरा समेत 38 स्वास्थ्य केंद्र इस समय चिकित्सा
विहीन हो गए हैं। दिगरा मुवानी के जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार नें संबद्ध चिकित्सकों को मूल स्थान में तैनाती देने की मांग की है। ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक अस्पतालों पर ही लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल का जिम्मा है। जिले में 30 आयुर्वेदिक चिकित्सकों के पद पहले से ही रिक्त हैं। चीन और नेपाल सीमा से सटे होने के कारण जिले के ग्रामीण क्षेत्र संवेदनशील भी माने जाते हैं। यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आदि न के बराबर हैं।
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. जीसीएस जंगपांगी के मुताबिक डॉक्टरों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों को लगातार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं।